हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५० हिन्दुत्व
बड़ा संकट उपस्थित हुआ। अमेरिकाके नीग्रो भी अपने अफ्रिका-
वासी नीग्रो भाइयोंसे जितना प्रेम करते हैं उतना अपने अमेरिका-
वासी यूरोपियनोंसे नहीं। इसलिये अमेरिकाका भाग्य वहांके
ऐंग्लो-सैकसन लोगोंके भाग्यसे ही बंधा हुआ है। यही बात
हिन्दुओंकी है। इनका भूत, भविष्य, वर्तमान तीनों काल
हिन्दुस्थानके साथ दृढ़बद्ध होनेसे यही देश उनकी “पितृभू'
और “पुण्यभू है। इसलिये हिन्दुस्थानी या भारतीय राष्ट्रकी
आधारभूमि हिन्दू ही हैं। इसलिये भारतीय राष्ट्रके नाते भी,
हिन्दू भाइयो, अपनी हिन्दू राष्ट्रीयताको सुदृढ़ और संघटित
करो; अपने अहिन्दु भाइयोंको या संसारके किसी भी प्राणीको
किसी प्रकारका कष्ट पहुंचानेके लिये नहीं बल्कि इसलिये
कि संसारमें चारों ओर जो गुट कायम हुए हैं उनमेंसे
किसीके लिये भी यह संभव न हो कि वह हमारे ऊपर आक्रमण
कर सके। जब हिन्दुस्थानके अन्य समाज हिन्दुस्थानके ही हितको
अपना सबसे श्रेष्ठ हित और धर्म माननेको तैयार नहीं हैं और
जबतक संसारके सभी देश मानव-जातिके हितको अपना व्यव-
हार्य लक्ष्य बनानेको तैयार नहीं हैं, बल्कि ये सब लोग जाति या
धर्म-संप्रदयदाय या राष्ट्रके नाते संकुचित स्वार्थों की बुनियादपर
आक्रमण और संरक्षणके लिये, गुटबंदियां कायम कर रहे हैं, तब-
तक, कमसे कम तबतक तो हिन्दुओ, अपने उन सूक्ष्म बंधनोंको
दृढ़ करो जो तुम्हारे एकीभूत विराट शरीरके ही स्नायु हैं। जो
लोग इन बन्धनोंको तोड़ डालनेकी आत्मघात:करनेवाली चेष्टा