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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 167 में से

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पृष्ठ 164

१३८ हिन्दुत्व
हों, सिख हों, सनातनी हों, कोई भी हों; क्या इस महासंघसे
अलग होकर इसे नष्ट करना क्या आपके लिये लाभकारी होगा ?
और आपका यह संघ भी कैसा संघ है—सन्धियोंके कागजोंसे
जुटा हुआ कोई कृत्रिम संघ नहीं, संकट विशेषके भयसे बना
हुआ संघ नहीं, बल्कि यह ऐसा संघ है जो एक रक्त और एक
संस्कृतिके अखंडनीय बन्धनोंसे संघटित हुआ है। यदि कुछ
सामर्थ्य हो तो इस संघको और बलशाली बनाओ। अल्पसंख्यक
समाज यह ध्यानमें रखें कि वे अखिल हिन्दू जातिसे अलग होकर
जिस डारपर बैठे हैं उसी डारको काटनेका काम करेंगे। जिस
किसी संबंधसे तुम अखिल हिन्दू जातिके साथ संबद्ध हो चाहे
वह संबंध रक्तका हो, भाषाका हो, पर्व और त्योहारोंका हो,
संस्कृति और मातृ-भूमिका प्रेम हो, उसे और भी मजबूत करो।
हिन्दू रक्तकी यह प्राचीन पुनीत धारा अटकसे कटकतक नस-
नसमें प्रवाहित हो और समग्र हिन्दू-जाति एक, अखंड, अभेद्य और
फौलादकी तरह तीक्ष्णण हो।
एक बार पीछे फिरकर देखो, और फिर वर्तमानको देखो।
क्या दिखायी देता है?—एशियामें अखिल-इस्लाम-संघ, यूरोपमें
राजनीतिक संघ, अफ्रीका और अमेरिकामें नीग्रो जातिका संघ,
इन दृश्योंको देखकर सोचो कि तुम्हारा भविष्य इस हिन्दू देशके
भविष्यमें ही मिला हुआ है या नहीं; और यह हिन्दू-देशका
भविष्य आखिर तुम हिन्दुओंकी ही शक्तिपर निर्भर करता है या
नहीं। हम लोग अपने भरसक ऐसा उद्योग कर रहे हैं और ऐसा