हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दूजातिकी शक्ति १४३
देशकी नहीं है। इसलिये हम हिन्दुओंमें वह प्रेम-बन्धन है—
मातृभूमिका प्रेम ही हमारा सबसे पहला धर्म है और इससे वह
प्रेमबन्धन इतना दृढ़ है कि वह राष्ट्रको संघटित और सुदृढ़ रख-
कर उसे अधिकाधिक पराक्रम करनेका उत्साह और सामर्थ्य
प्रदान करता है।
हिन्दुत्वका जो दूसरा लक्षण है वह हमारे राष्ट्र-संघटन और
गौरवकी प्रच्छन्न शक्तियोंको जगानेमें और भी अधिक समर्थ होता
है। चीनको छोड़ संसारमें कोई ऐसा देश नहीं है जहां लोग इतने
एक जातीय और साथ ही इतने प्राचीन, और संख्याबल तथा
जीवनी शक्तिदोनोंके विचारसे इतने शक्तिमान हों जितने कि हिन्दु-
स्थानमें हम हिन्दू हैं। अमेरिकन लोग, जिन्हें हम देखते हैं कि राष्ट्री-
यताके देशिक आधारमें हमारे समान ही सौभाग्यवान हैं, तौभी
वे इस बातमें हमसे पीछे ही रह जाते हैं। मुसलमान तो कोई
जाति ही नहीं हैं और न ईसाई ही। इनका तो साम्प्रदायिक
संघ है—जातीय या राष्ट्रीय संघ नहीं। पर हम हिन्दू जातीय
संघ हैं, साथ ही साम्प्रदायिक और राष्ट्रीय संघ भी, और हम
रहते भी हैं उसी एक ही प्राचीन हिन्दू-देश हिन्दुस्थानमें ही।
हमारा संख्याबल भी कम नहीं है।
और संस्कृति? अंगरेज और; अमेरिकन दोनों अपनेको
एक जातिके समझते हैं, क्योंकि शेक्सपियरपर दोनोंका एकसा
अधिकार है। परंतु हम हिन्दुओंके लिये अकेले कालिदास या
भास ही नहीं हैं, रामायण और महाभारत भी हम सब हिन्दुओं-