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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 160, कुल 167 में से

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पृष्ठ 160

१४४ हिन्दुत्व
की समान संपत्ति हैं! और वेद? वेदोंकी बात ही क्या कहें?
अमेरिकामें अमेरिकन बालकोंको एक राष्ट्रगीत सिखाया जाता
है जिसमें उनके हृदयमें आत्मगौरवका भाव जगानेके लिये यह
कहा गया है कि, "अमेरिकनो, तुम्हारे पीछे चार सौ वर्षका
इतिहास खड़ा है!" हम हिन्दुओंका इतिहास सदियोंके इस छोटेसे
पैमानेसे नहीं नापा जाता, बल्कि यहां युगों और कल्पोंसे गिनती
करनी पड़ती है और आश्चर्यके साथ यह पूछना पड़ता है कि
"रघुपतेः क्व गतोत्तरकोशला। यदुपतेः क्व गता मथुरापुरी !!"
हिन्दू आत्मगौरवका भाव जगानेका इतना प्रयत्न नहीं करता
जितना सत्यको जगानेका प्रयत्न करता है। और शायद इसी
कारणसे रामसेस और नेबुचडनजरकी अपेक्षा हिन्दू अधिक आयु-
ष्मान् है। जिस राष्ट्रको कोई भूतकाल नहीं, उसका कोई भविष्य-
काल भी नहीं। यदि यह सच है तो जिस हिन्दू-जातिने भूतकालमें
अनंत वीरोंको जन्म दिया और जिसको यह स्मरण है कि हमने
यूनान और रोम, फारोहा और इनकस जैसे राष्ट्रोंका ध्वंस
करनेवाली शक्तियोंको भी नष्ट कर डाला, उस हिन्दू-जातिके
इतिहासमें निश्चय ही यह इसके भविष्यका भी अन्य किसी
भी जातिसे अधिक विश्वसनीय आश्वासन है।
परंतु संस्कृतिके अतिरिक्त पुण्यभूमिका एक होना ऐसा
बन्धन है जो कभी कभी मातृभूके बन्धनसे भी अधिक बल-
शाली होता है। मुसलमानोंको देखिये। दिल्ली और आगरेकी
अपेक्षा मक्केकी ओर ही उनका ध्यान अधिक जाता है। कुछ