हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४२ हिन्दुत्व
हिमाच्छादित टेम्स नदीमें चाहे जितनी तेजीके साथ अपना प्रपंच
रचिये; यहां तो पतितपावनी गङ्गाके किनारे चन्द्रमाके शीतल
शुभ्र प्रकाशमें घाट घाट नौकाओंद्वारा विहार करनेमें ही अधिक
आनन्द आता है। हमारा यह हल, यह मयूर, यह कमल, यह
हाथी और यह गीता बनी रहे, फिर चाहे हिमाच्छन्न देशोंमें जो कुछ
आनन्द हो वह न मिले तो आर्यमाताको कोई परवा नहीं।
सब कुछ अपने मन जैसा हो यह नहीं होता। इसके उद्यानोंमें
हरियाली छायी हुई है, इसके खलिहान भरे हुए हैं, इसकी
सर-सरिताओंका जल स्फटिकके समान स्वच्छ है, इसके पुष्प
सौरभमत्त हैं, इसके फल सरस हैं और इसकी जड़ी-बूटियोंमें
रोग-निवारणकी अद्भुत शक्ति है। इसकी चित्रकलाकी तूलिका
उषाके रंगोंमें रंगी हुई और उसकी वीणाका गीत गोकुलके
संगीतसे मिला हुआ है। सचमुच ही हिंदमाता परमेश्वरकी
सकल ऐश्वर्य-संपन्न कन्या है।
क्या इंग्लेण्ड और क्या फ्रांस—चीनियों और कदाचित्
अमेरिकनोंको छोड़कर—कोई देश ऐसा नहीं है जो नैसर्गिक बल
और वैभवमें सिन्धुस्थानकी बराबरी कर सके। एक देश—
एक घरका होना स्थायी और सुदृढ़ राष्ट्रके होनेके लिये, सबसे
पहली बात है। संसारमें जितने देश हैं उनमें कोई ऐसा देश नहीं
है जो इस विषयमें हिन्दुस्थानसे बढ़कर हो—हिन्दुस्थान-
की भूमिकी रचना एक महान् राष्ट्रकी समृद्धिके लिये जितनी
उपयुक्त है उससे अधिक उपयुक्त प्राकृतिक रचना और किसी भी