हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३८ हिन्दुत्व
वे अपने अन्तःकरणमें यह अनुभव करती थीं कि मैं हिन्दू हूं, और
यही एकही बात और सब बातोंसे बढ़कर है और हिन्दुत्व परख-
नेकी सच्ची कसौटी है। पर इस बातको भूलनेसे काम न चलेगा
कि हम हिन्दुत्वके लक्षण बहुजन समाजके संस्कारोंकी बुनियाद-
पर ही स्थिर करते हैं। और इसलिये हमें यह कहना पड़ेगा कि
अहिन्दू माता-पितासे उत्पन्न कोई मनुष्य तभी हिन्दू हो सकता
है जब इस देशको स्वदेश मानकर इस देशमें अपना रक्त-संबंध
करे और इस तरह इसे यथार्थमें पितृभू मानकर पूजे, और हमारी
संस्कृतिको मानकर इस देशको अनन्य भावसे अपनी पुण्यभू
माने। इस प्रकारके सम्बंधसे आगे होनेवाली सन्तति निश्चय ही
हिन्दू होगी। इसके आगे अब हम नहीं बढ़ सकते।
परन्तु, हिन्दूके किसी धर्म-सम्प्रदायको माननेसे कोई भी
विदेशी मनुष्य सनातनी, सिख या जैन कहला सकता है और ये
सब धर्म-सम्प्रदाय हिन्दूद्वारा ही प्रवर्त्तित होनेसे ये सब हिन्दू-
धर्म भी माने जाते हैं और इसलिये इनमेंसे किसी भी सम्प्रदायमें
सम्मिलित मनुष्य धर्म-सम्प्रदायके नाते "हिन्दू" कहला भी
सकता है। परन्तु ध्यानमें रखनेकी बात यह है कि इस प्रकारसे
धार्मिक विश्वास और संस्कार-संस्कृतिसे हिन्दू बना हुआ विदेशी
मनुष्य हिन्दुत्वके तीन लक्षणोंमेंसे केवल इस एक ही लक्षणसे
युक्त है अर्थात् केवल किसी हिन्दू-धर्म-सम्प्रदायको माननेसे ही
वह हिन्दू नहीं माना जाता। हमारी मातृ-भूमि और संस्कृतिकी
जो अमूल्य सेवा भगिनी निवेदिता या एनी बेसंट जैसी विदुषियों-