हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंUploaded By Rajesh Tanti.
हिन्दूजातिकी शक्ति १३६
द्वारा होती है उसके लिये हमारे हृदयमें इतनी कृतज्ञता है, हिन्दू-
जाति किसीके प्रेम-स्पर्शसे इतनी मृदुलहृदय हो जाती है कि
भगिनी निवेदिता अथवा उनके जैसी कोई स्त्री या पुरुष अपने
जीवनको हिन्दू-जातिके जीवनसे समरस कर दें तो हिन्दू-जातिमें
आप ही उनका बेमालूम समावेश हो जाता है । परन्तु इसे सामान्य
नियमका अपवाद ही समझना चाहिये । और कोई सामान्य
नियम बहुत कठोर भी नहीं हो सकता और बहुत मुलायम भी
नहीं हो सकता । जिन कसौटियोंपर हमने हिन्दुत्वकी परिभाषा-
को अबतक कसा उनसे यह स्पष्ट हो गया होगा कि इस परि-
भाषामें ये दोनों बातें हैं और उसमें न अव्याप्तिका दोष है और
न अतिव्याप्तिका ।
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(८)
हिन्दूजातिकी शक्ति
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यहां तक हमने हिन्दुत्व क्या है, इस बातका तटस्थ रहकर
विचार किया और उसमें उपयुक्तताका विचारतक न आने दिया ।
अब सम्पूर्ण विवेचन जब हो चुका है तब इस बातका विचार
करना अप्रासंगिक न होगा कि हिन्दुत्वके इन लक्षणोंसे हमारी
जातिकी शक्ति, अखण्डता और उन्नतिमें कहां तक सहायता मिल
सकती है । क्या ये लक्षण इतनी विस्तृत, इतनी गहरी ओर