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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 167 में से

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परिभाषाकी जांच १२३
उल्लेख किया जाता है तब उसमें दोनों ही तट आ जाते हैं और
इसलिये सिन्धु नदीके पश्चिम तटका सारा प्रदेश निसर्गतः ही
“सिन्धुस्थान” का ही अंश है और इसलिये वह हमारी परि-
भाषाके अन्दर आ जाता है। सिंधु नदीके इस पश्चिम तटप्रदेश-
पर जो लोग रहते हैं वे निःसन्देह प्राचीन सिंधुओंके वंशज हैं
और उन्होंने आजतक अपना और अपनी भूमिका प्राचीन नाम
नहीं बदला है-वे आज भी सहस्रों वर्ष पूर्वकी तरह "सिंधुदेश"
की संतान "सिन्धी" ही कहलाते हैं। दूसरी बात यह है कि मुख्य
भूमिके आस-पासकी भूमि भी मुख्य भूमिके नामसे ही पुकारी
जाती है और तीसरी बात यह है कि सिंधुके उस पार रहनेवाले
ये हिन्दू परम्परासे इस हिन्दुस्थानको ही अपनी पितृ-भू और
पुण्य-भू मानते आये हैं। उन्होंने कभी अपने रहनेके छोटेसे
प्रदेशको ही “पितृ-भू” और “पुण्य-भू” मान बैठनेकी मातृ-
घातक कल्पना करनेका पाप नहीं किया। प्रत्युत हमारी जो
काशी, कैलास और गंगोत्री है वही काशी, कैलास और गंगोत्री
उनकी भी है। वैदिक कालसे ही वे भारतवर्षके एक प्रधान अंग
हैं। रामायण और महाभारतमें “सिन्धु शिविसौवीरों” का उल्लेख
है और वे महान् हिन्दू जातीय संघ और राष्ट्रके अंग ही हैं। वे
हमारे राष्ट्र, जाति और संस्कृतिके ही हैं; इसलिये वे हिन्दू हैं
और हमारी परिभाषाके अन्दर आते हैं।
परन्तु यदि कोई इस बातको न भी माने कि किसी नदीका
अपनी हदके अन्दर होना उसके दोनों तटोंका उस सीमाके अंदर