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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 167 में से

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पृष्ठ 138

( ७ )
परिभाषाकी जांच
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अबतक हिन्दुत्वका जो स्थूल विवेचन किया गया उससे
“हिन्दुत्व” के मुख्य लक्षणोंका बोध करानेवाली एक काम
चलाने लायक परिभाषा तैयार हो गयी । अब यह सर्वसामान्य
परिभाषा किस प्रकार सर्वत्र घटती है यह देखना बाकी है । यह
काम कुछ खास उदाहरण लेकर और जिन उदाहरणोंके कारण
यह परिभाषा करनेकी आवश्यकता पड़ी ऐसे ही उदाहरण लेकर
किया जा सकता है । इस परिभाषाको निश्चित करते हुए, हमने
इस बातकी सावधानी रखी है कि इसमें अतिव्याप्तिका दोष न
आने पावे। अब कुछ खास उदाहरण लेकर उनपर इस परि-
भाषाको हम यथार्थमें घटा सके तो यह निश्चय हो जायगा कि
इसमें जैसे अति-व्याप्तिका दोष नहीं है, वैसे ही अव्याप्तिका भी
दोष नहीं है ।
हिन्दुओंमें जो दैशिक विभाग हुए हैं वे इस परिभाषासे पूर्ण
सुसंगत हैं, यह उन विभागोंको देखनेके साथ ही प्रतात हो
जायगा । हमारी परिभाषाका मूलतत्त्व “आसिन्धु सिन्धु-
पर्यन्ता” भूमि है । हमलोगोंमेंसे बहुतसे लोग सिन्धु नदीके उस
पारकी भूमिमें वास करते हैं । तथापि जब किसी नदीके तटका