हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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फिर भी वे सब हिन्दू हैं। उसी प्रकार स्वदेशको स्वदेश मानने-
वाले बोहरा या खोजा या कोई ईसाई जिनमें हिन्दुत्वके ये तीनों
लक्षण इस हदतक मौजूद हों वे हिन्दू क्यों न माने जायँ ?
ऐसे लोग सचमुच हिन्दू माने जा सकते थे। परंतु हिन्दुत्व-
के एक विशिष्ट लक्षणकी कसौटीपर कसनेसे उनका हिन्दू कहा-
नेका अधिकार नष्ट हो जाता है। वह विशिष्ट लक्षण हिन्दू-
संस्कृतिके अन्दर आ जा सकता है। पर वह इतना महत्वपूर्ण है
कि हिन्दू-संस्कृतिकी अन्य बातोंमें वह लुप्त नहीं किया जा
सकता। इसीलिये उसका विशेष विवेचन करना आवश्यक है।
इस विवेचनमें हिन्दुत्वके धार्मिक स्वरूपकी ओर ध्यान देनेकी
आवश्यकता होगी। याहांतक हमने जो कुछ प्रतिपादन किया
उसमें इस बातका विचार नहीं किया, इसलिये नहीं कि ऐसा
करनेमें हम किसी प्रकार सकुचते थे, बल्कि इसलिये कि
हिंदुत्वके लक्षणोंका विवेचन अधिक सांगोपांग और परिणाम-
कारक करनेके लिये हमने धार्मिक पहलूके विचारके लिये एक
पृथक् अध्याय ही रख छोड़ा है। सब पहलुओंसे इस विषयका
विचार करनेकी सामग्री याहांतक पूरे तौरपर जुट गयी है और अब
“हिन्दुत्व” और “हिन्दू-धर्म” इन दोनोंके बीच क्या अन्तर है, यह
निश्चित करनेका काम अधिक सुलभ होनेवाला है।