हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
पृष्ठ 121, कुल 167 में से
संदर्भ में पढ़ें( ६ )
हिन्दुत्वकी परिभाषा
“हिन्दुत्व” और “हिन्दू-धर्म” ये दोनों शब्द “हिन्दू” शब्दसे
निकले हुए हैं, इसलिये उनका अर्थ समग्र हिन्दू-जातिसे सम्बन्ध
रखनेवाला होता है। हिन्दू-धर्मकी जिस किसी परिभाषामें
हमारी जातिका कोई भी अंग छूट जाय अथवा उसे अपने
धार्मिक संस्कारोंको छिपा रखना पड़े वह परिभाषा किसी काम-
की न होगी। हिन्दू-धर्म वह धर्म है जो सब हिन्दुओंका सामान्य
धर्म है। यह सामान्य हिन्दू-धर्म क्या है यह जाननेके लिये हमें
यह जानना होगा कि हम हिन्दू कहते किसको हैं—हिन्दू-शब्दकी
परिभाषा क्या है। परंतु इस बातको भूलकर कि हिन्दू कौन है
यह जाननेका मुक्त मनसे प्रयत्न किये बिना हिन्दू-धर्मकी
परिभाषा नहीं हो सकती, बहुतसे लोग हिन्दू-धर्मकी ही पहले
व्याख्या करने लग जाते हैं और हिन्दू-धर्मके कोई ऐसे लक्षण नहीं
पाते जिनमें अतिव्याप्तिका दोष न हो और जिनमें सब हिन्दू-
समाजोंका समावेश हो जाय। परिणाम यह होता है कि
उन्हें ऐसे सर्व सामान्य लक्षण नहीं मिलते और लाचार होकर वे
इस नतीजेपर पहुंचते हैं कि अमुक जातियां हिन्दू ही नहीं हैं!
“हिन्दू ही नहीं हैं” इसलिये नहीं कि जिन लक्षणोंकी कसौटी-