सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 107, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 107

हिन्दुत्वके तीन लक्षण , ६१
भी तो इस बातको नहीं भूल सकते कि उनके अन्दर भी हिन्दू-
रक्त ही दौड़ रहा है। परन्तु हम जो इस बातकी जांच कर रहे हैं
क वस्तुस्थित क्या है, न कि वस्तुस्थिति क्या होनी चाहिये, क्या
यह कह सकते हैं कि ये मुसलमान हिन्दू हैं? काश्मीर तथा
हिन्दुस्थानके अन्य अनेक भागोंमें ऐसे मुसलमान हैं और दक्षिण
भारतमें ऐसे क्रिस्तान हैं जो जातिभेदके नियमोंको यहां तक
मानते हैं कि अपनी बिरादरीके अन्दर ही शादी ब्याह करते हैं।
इससे यह स्पष्ट है कि उनका हिन्दू-रक्त ज्यों-का-त्यों बना हुआ है;
उनमें विदेशी रक्तका मिश्रण नहीं हुआ है। फिर भी हिन्दू
शब्दका प्रयोग जिस अर्थमें होता है उस अर्थमें उन्हें हिन्दू तो नहीं
कह सकते। कारण, हम हिन्दू जो एक जाति हैं उसका कारण
केवल यही नहीं है कि हम एक पितृभूमिके उपासक और एक ही
रक्तके उत्तराधिकारी हैं; बल्कि इसके साथ ही एक बात है जो
हिन्दूके हिन्दुत्वका वैसा ही महान् लक्षण है जैसे पूर्वकथित ये
दो लक्षण। वह बात यह है कि हम हिन्दू एक संस्कृतिके मानने-
वाले हैं। वह हिन्दू-संस्कृति महान् संस्कृति है जिसका भाव
प्रकट करनेके लिये संस्कृत शब्द ही अत्यन्त उपयुक्त और सार्थ
है। कारण, इस शब्दसे "संस्कृत" भाषा भी सूचित होती है
जिस संस्कृत भाषामें वह संस्कृति संरक्षित है, जिसमें हिन्दू-
जातिके इतिहासमें जो जो कुछ संग्राह्य और उत्तम है उसका
प्रकाश हुआ और जिसमें यह संपूर्ण ज्ञान संचित भी हुआ। हम
हिन्दू एक हैं, कारण हम लोग एक राष्ट्र हैं, एक जाति हैं और
हमारी एक संस्कृति है।