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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

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पृष्ठ 108

६२ • हिन्दुत्व
पर संस्कृति आखिर क्या वस्तु है ? संस्कृति मानवी मनकी
अभिव्यक्ति है । संस्कृति प्रकृतिके मानवी रूपान्तर और विस्तार-
का इतिहास है । यदि प्रकृति परमात्मा द्वारा निर्मित हुई है तो
संस्कृति मनुष्य द्वारा उसोकी अनुकृति है । इस संस्कृतिका
सर्वोत्तम रूप प्रकृति और मनुष्यपर मनुष्यकी आत्माकी पूर्ण
विजय है । जहां कहीं और जहांतक मनुष्य प्रकृतिको इस प्रकार
बना लेता है जिससे आत्माको आनन्द हो वहीं उसी हदतक
संस्कृतिका आरम्भ होता है । और जहां सामर्थ्य, सौंदर्य और
प्रेम, इनके सम्बन्धमें मनुष्य अपनी स्वर्गीय आकांक्षाएं पूर्ण करके
परमानन्दके सब मार्ग ढूंढकर जीवनका पूर्ण विकास और
उसका ऐश्वर्य अनुभव कर लेता है, वहां संस्कृतिकी पूर्ण विजय
होती है ।
किसी राष्ट्रकी संस्कृतिका इतिहास उस राष्ट्रके विचार,
आचार और पुरुषार्थ-सिद्धिका इतिहास होता है । काव्य और
कलासे उसके विचारोंका पता लगता है, इतिहास और सामा-
जिक संस्थाओंसे उसके आचार और सम्पादित पुरुषार्थ मालूम
होते हैं । इनमेंसे किसी भी बातमें मनुष्य अन्य मनुष्योंसे अलग
नहीं रह सकता । अंदमानकी आदिम वन्य जातिकी काठकी
पटियोंको जोड़-जाड़कर भद्दोसी शकलकी डोंगीमें बैठकर ( जिसे
वहां डुं'गी कहते हैं ) उसका अनुकरण बिलकुल आधुनिक अमे-
रिकन ड्रे टनाटके तैयार करनेमें कुछ न कुछ होता ही है । पेरि-
सकी नवयुवतियोंकी पोशाकमें जो बिलकुल नयी फैशन निकली