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सर्वकोश
हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)

हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)

Hastyayurveda Gajashastra of Palakapya Muni with Commentary

पालकाप्य मुनि (सम्पादक: पं. शिवदत्त शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished742 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 742 में से

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पृष्ठ 88

= द्द्वि? Or द् + वि = द्वि?
Ah! Sandhi: लक्षणाभावात् + विषपरिगतम् -> लक्षणाभावाद्विषपरिगत!
In Devanagari: द् + वि = द्वि! It is written as द्विषपरिगत!
Wait, is there a double 'द'?
Look at द्विषपरिगत: it's just द्वि (dvi)! लक्षणाभावाद्विषपरिगत (viṣaparigata = affected by poison).

  • L22: इति केचित् । ग्रहेणायं गृहीत इत्यपरे मूढा मिथ्याज्ञानात् । सनिदानौ हि
    Wait, look after मूढा: is there a dot?
    There is a dot at the bottom between मूढा and मिथ्याज्ञानात्. Probably a space/spot.
  • L23: तौ, अयमनिदानश्चाचिकित्स्यश्चेति ।
  • L24: तत्र श्लोकः—
  • L25: यथा हि हन्यात्कूटेन मृगशावं वनेचरः ॥
  • L26: तथा वातात्मको नागं हन्ति वै कूटपाकलः ॥
  • L27