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गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi

महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished600 पृष्ठ

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आपोवत्सं जनयन्ती ( ५५२ ) उत्क्रमोऽसि
भाग, भाग,
मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ
कण्डिका कण्डिका
आपो वत्सं जनयन्ती पू १, २ ४ इन्द्रस्य बाहू स्थविरो उ १, १८ २८६
आपो वत्सं जनयन्ती पू १, ३६ ७४ इन्द्रस्यौजो मरुताम पू २, २१ १२५
आ प्यायस्व मदिन्तम उ ३, ६ ३७० इन्द्राग्नी अपसस्प उ ३, १५ ३६३
आ यातं मित्रावरुणा उ ३, १३ ३८६ इन्द्राग्नी आगतं सुतं उ ३, १५ ३६३
आ याहि सुषुमाहि उ ३, १४ ३६१ इन्द्राग्नी उपह्वये उ ३, १५ ३६३
आ याह्यर्वाङुप व उ ६, २ ४६५ इन्द्राय मद्धने सुतं उ ५, ३ ४५८
आरोहोऽसि उ २, १४ ३३६ इन्द्राय सोमाः प्रदिवो उ २, २१ ३५४
आ वात वाहि भेषजं पू ३, १३ १६१ इन्द्रावरुणा मधुम उ ४, १५ ४४०
आ वां राजानावध्व उ ४, १५ ४४० इन्द्रा वरुणा सुतपा उ २, २२ ३५७
आ वो वहन्तु सप्तयो उ २, २२ ३५८ इन्द्राय हि द्यौरसुरो उ ६, १ ४६४
आ सत्यो यातु मघवाँ उ ५, १५ ४८६ इन्द्रावरुणा युवमध्व उ ४, १५ ४४०
आहं सरस्वतीवतो उ ५, १३ ४८३ इन्द्रावरुणा सुतपौ उ ४, १५ ४३७
इन्द्राविष्णू पिबतं उ २, २२ ३५८
इ इन्द्राविष्णू पियतं उ ४, १७ ४४८
इग्यणः सम्प्रसा पू १, २६ ४५ इन्द्राविष्णू मदपती उ ४, १७ ४४७
इच्छन्ति त्वा सोम्यासः उ ६, १ ४६४ इन्द्रेण रोचना दिव उ ५, १३ ४८३
इदं वसो सुतमन्धः उ ५, ३ ४५८ इमं स्तोममर्हते उ २, २२ ३५६
इदं ह्यन्वोजसा उ ५, ३ ४५८ इमा उ वां दिविष्टय उ ५, ३ ४६०
इदं जना उपश्रुत उ ६, १२ ६४७ इमा उ वां दिविष्टय उ ५, १० ४७६
इदं ते सोम्यं मध्व उ २, २० ३५१ इमा ते वाजिन्त्रव पू २, २१ १२५
इदमित्था रौद्रं गूर्तं उ ६, ७ ५१२ इमा नु कं भुवना उ ६, १२ ५३०
इन्द्रः कारूमबूबुधत् उ ६, १२ ५२८ इमामू षु प्रभृतिं उ ४, ३ ४१८
इन्द्रः पूर्भिदाति उ ४, २ ४१५ इमामू षु प्रभृतिं उ ६, १ ४६४
इन्द्रः पूर्भिदाति उ ६, १ ४६३ इयं त इन्द्र गिर्वणो उ ४, १७ ४४७
इन्द्रं वो विश्वतस्प उ ५, १२ ३८७ इयं पित्र्या राष्ट्र्च्रे उ २, ६ ३२०
इन्द्र ऋभुभिर्वाज उ २, २२ ३५७ इषे त्वोर्जे त्वा पू १, २६ ५२
इन्द्र एषां नेता उ २, २ ३०८ इहेत्थ प्रागपागु उ ६, १३ ५३६
इन्द्र ऋतुविदं सु उ ३, १४ ३६१ इहेन्द्राग्नी उपह्वये उ ३, १५ ३६३
इन्द्र जीव सूर्यं जीव पू १, ३६ ७५
इन्द्र त्वा वृषभं उ २, २० ३५१ उ
इन्द्र पिब प्रतिकामं उ ३, १४ ३६० उक्षाणाय वशानाय उ २, २० ३५२
इन्द्रश्च सोमं पिबतं उ २, २२ ३५८ उच्चा पतन्तमरुणं पू २, ६ ६७
इन्द्रश्च सोमं पिवतं उ ४, १६ ४४३ उत श्वेत आशुषत्त्वा उ ६ १४ ५४२
इन्द्रस्य नु वीर्याणि उ ३, १२ ३८६ उत्क्रमोऽसि उ २, १४ ३४०