गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)
Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi
महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंओं३म्
गोपथब्राह्मण भाष्य में वेदमन्त्र, ब्राह्मण वचन
आदि की वर्णानुक्रमणसूची ॥
भाग, भाग;
मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ मन्त्र आदि प्रपाठक, पृष्ठ
कण्डिका कण्डिका
अ अभि तष्टेव दीधया उ ६, २ ४१६
अभि प्र वः सुरा उ ६, ७ ५१२
अथँ शुग्गुँशुष्टे उ २, ४ ३१३ अभूद् देवः सवि उ ४, ७ ४२५
अग्न आ याहि पू १, २६ ५३ अमेव नः सुहवा उ २, २२ ३५८
अग्निं होतारं मन्ये उ ६, १० ५२१ अमोऽहमस्मि सा त्वं उ ३, २० ४०४
अग्निं दूतं वृणीमहे पू २; २३ १२६ अयं त इध्म आत्मा उ १, ४ २७०
अग्निं दूतं वृणीमहे उ ३, १२ ३८५ अयं ते योनिऋतं उ ४, ६ ४२६
अग्निमीडे पुरोहितम् पू १, २९ ५२ अयं नो नमसस्प उ ४, ६ ४२८
अग्निमीडे पुरोहितम् उ १, ४ २७० अयमु त्वा विचर्ष उ ३, १४ ३६१
अग्निर्विद्वान् यज्ञं पू १, १२ २५ अथर्वदधातुरप्रत्ययः पू १, २६ ४५
अग्निवासाः पृथि पू २, ६ ६७ अवर्डेहि सोमकामं उ २, २१ ३५४
अग्नीषोमावदधु उ २, ६ ३२७ अव द्रप्सो अंशु उ ६, १६ ५४७
अग्ने पत्नीरिहा उ २, २० ३५१ असि यमो अस्यादि पू २, २१ १२५
अच्छा म इन्द्रं उ ४, १६ ४४४ अस्तम्नाद् द्यामसुरो उ ४, १५ ४४६
अदितेऽनुमन्यस्व उ १, ४ २७१ अस्मा इदु प्र तवसे उ ५, १५ ४८५
अघा हीन्द्र गिर्वण उ ४, १७ ४४७ अस्मे प्र यन्धि मघ उ ४, ३ ४१९
अधिपतिरसि उ २, १४ ३३६ अस्य देवाः प्रदिशि उ ५, ८ ४७२
अनितिरसि उ २, १३ ३३५ अहन् वृत्रं वृत्रतरं उ ५, ६ ४६७
अनुख्यात्रे नमः उ २, १६ ३४८ आ
अनुमतेऽनुमन्यस्व उ १, ४ २७१ आक्रमो ऽसि उ २, १४ ३४०
अनुरोहोऽसि उ २, १४ ३३६ आग्निरगामि भारतो उ ४, १५ ४३६
अनुवृदसि उ २, १४ ३३६ आचार्यो ब्रह्मचारी पू २, ५ ८५
अन्तरिक्षे पथिभिः पू २, ६ ६७ आदित्या रुद्रा वसव उ ६, १४ ५४२
अप प्राच इन्द्र विश्वाँ उ ६, ८ ५१६ आदित्या ह जरितर उ ६, १४ ५४२
अपेन्द्र प्राचो मध उ ६, ४ ५२५ आ नो याहि सुता उ ३, १४ ३६१
अपेन्द्र प्राचो मध उ ६, १२ ६४७ आपतये त्वा परि उ २, ३ ३१०
अभिजिदसि उ २, १३ ३३८ आ पूर्णो अस्य कलश उ २, २१ ३५५
अभि तष्टेव दीधया उ ६, १२ ४६३