घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४० / घट रामायण
भिनि भिनि नाम बिधी बतलाऊँ। पवन पचासी बरनि सुनाऊँ॥
पिंड में पवन पचासी बासा। सो निज भाखौं भेद खुलासा ॥
॥ नीर के नाम ॥
अर्थ-प्रथम 'अजीत' जल का वर्णन करता हूँ। दूसरे जल का नाम 'कर्त्ता' जल है। तीसरा जल,
अनूप है। चौथा पहचाना गया जल 'मुक्ति' जल है। पाँचवाँ जल 'पुरइन' के नाम से प्रमाण रखता है
और छठाँ जल 'अंबुज' जल कहा गया है। सातवाँ जल 'विषया' है और आठवाँ जल 'अटला सुर' है॥
नवा नीर दुख को नष्ट करने वाला 'नाटक' है। दसवाँ जल दसों द्वारों को छेदने वाला है। एकादश
नीर काल है-बारहवाँ जल जहाँ जीव प्रस्थान करता है (या जीव जल है)।।
तेरहवाँ जल 'पुरुष' का ध्यान है-जो उसे बूझता है, उसे पिंड का ज्ञान हो जाता है। चौदहवें जल में
जीव की संसक्ति है पन्द्रहवाँ जल वह है जिससे लोकपीड़ा झेली जाती है॥
सोलहवाँ जल स्वर्ण का साथी है और सत्रहवां जल रूपरस का आनन्द है। अट्ठारहवाँ जल 'बोल'
है और उन्नीसवाँ जल पुष्प रंग से श्रेष्ठ है। बीसवें जल की 'कलंगी' के नाम से पुकारा जाता है और
उसका परिचय अपने शरीर के भीतर ही होता है। इक्कीसवाँ जल सुख सागर धाम का है, उस स्थान पर
'भ्रमर-कमल' दोनों उलझे हैं॥
बाइसवाँ जल घट मूल का राजा है और तेईसवाँ जल निराशा में बजता रहता है। चौबीसवाँ जल
चतुर सुजान है और पच्चीसवाँ जल बादल का प्रमाण है॥
तीसवाँ जल बल का भार है और इकतीसवाँ जल संसारी है। बत्तीसवाँ जल निर्गुण ब्रह्म की सृष्टि
है और तैंसवाँ जल आलस नाम का मीठा जल है। चौंतीसवें जल का 'सरोसिल' नाम है और पृथ्वी को
पैंतीसवाँ जल बताता हूँ॥ छत्तीसवें जल में 'कामिनी' का निवास है-वह ब्रह्मा और विष्णु का भोग
विलास है॥
जीव जन्तुओं का जल जीवन में निवास है-ये सभी काल के वश में होते हैं। छत्तीस जलों का इस
प्रकार नाम निर्धारित है और इन पर बिरला साधु ही विचार करता है॥
आगे में पचासी वायु का वर्णन करता हूँ-उनका नाम तथा भेद यहाँ वर्णित है। उनके भिन्न-भिन्न
नाम और भेद यहाँ बतलाये गये हैं-उन पचासी वायुओं का वर्णन करके सुनाता हूँ।
इस पिंड के भीतर पचासी पवनों का निवास है। मैं उनका स्पष्ट भेद करके वर्णन करता हूँ॥
पवन के नाम
१. रजलाय पवन १४. उपजीत पवन २६. सुख रोग पवन
२. केदार पवन १५. जगजीत पवन २७. ज्ञान कुंभ पवन
३. विलंभ पवन १६. पर राज पवन २८. मैना ऊँचा पवन
४. समीर पवन १७. बलकुंभ पवन २९. त्रिकोध पवन
५. गुरभो पवन १८. पतराज पवन ३०. किवलास पवन
७. श्रुतिअंध पवन १९. बलभेद पवन ३१. करनास पवन
८. नलपती पवन २०. बारुन पवन ३२. रस नाग पवन
९. ब्रह्मराज पवन २१. कुभेर पवन ३३. जनजीत पवन
१०. मंदोष पवन २२. जगजाय पवन ३४. सकरीत पवन
११. सकल तेज पवन २३. बेधुन्ध पवन ३५. बेलोक पवन
१२. मन सोत पवन २४. सकलंध पवन ३६. मनमोष पवन
१३. जग जोत पवन २५. सल सोख पवन ३७. बेरूप पवन