घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४६ / घट रामायण
अर्थ-तब तकी ने कहा कि तुलसी साहब आप हमारे गुरु और पीर हैं। मेरी गलतियों को क्षमा
करके मुझे अपना बना लें और यह बंदा तकी अब आपका है॥ १॥
तुलसी साहब ने जब तकी को उस दुखी अवस्था में देखा समझा कि यह पूरी तरह से मेरे मतों में
'पक गया है। तब बोले कि तुम अपने को गुहगार पाते हो, अब इससे ऐसा लगता कि तुमने अपनी तरफ
से (मन के अन्दर) झाँका और देखा है, आत्मालोचन किया है॥ २॥
तुलसी साहब कहते हैं कि हे तकी! तुमने तबक (सृष्टि की परतें) नहीं समझा और नवी
(धर्मगुरु) तथा नूर को भी नहीं प्राप्त किया है-स्वर्ग समझ कर इसनरक में तुम रहते रहे, तुम्हें खुदा
कैसे मिल सकते हैं॥ ३॥
॥रेखता नसीहत॥
तुलसी तबक जाना नहीं, बेहोस गाफिल हो रहा।
जिस ने तुझे पैदा किया, उस यार को चीन्हा नहीं॥ १॥
नाहक अदम दम खोवता, मुरसिद पकड़ नहिं डूबही।
तुलसी खलक कुल ख्याल है, आसिक मुहब्बत कर सही॥ २॥
खोजो मुहम्मद दिल-रहम, जिस इस्म से आलम हुआ।
तुलसी नबी निरखै नहीं, जहाँ लग मुसल्लम है नहीं ॥ ३॥
रब रूह मरहम ना हुआ, रब देख अंदर है सही।
तुलसी तकी बूझा नहीं, जग में जिया तो क्या हुआ ॥ ४॥
गन्दा नजिस क्यों हो रहा, इस जक्त में रहना नहीं।
अरे ऐ तकी तल्लास कर, तुलसी फना होना सही ॥ ५॥
चारो चसम को खोल कर, देखो जुलम जालिम वही।
जबरील को तैंना लखा, तुलसी खबर खोजा नहीं॥ ६॥
रोजा निमाज हर दम किया, उस यार को दिल ना दिया।
खोजा नहीं अपना पिया, तुलसी तकी दोजख लिया॥ ७॥
नासूत मलकूत जबरूत हैं, लाहूत लौं तैं ना लिया।
हाहूत हिये खोजा नहीं, ला में रबी जीता पिया॥ ८॥
तुलसी तकी तालिम दिया, हर दम गुनह बंदा हुआ।
मुरसिद मुरीदी दस्त है, पावै तकी अपना किया॥ ९॥
तुलसी रहम राजी हुआ, तोला तकी अपना किया।
दिया दस्त दरदी जान कै, तुलसी तकी मुरसिद हुआ॥ १०॥
अर्थ-तुलसी साहब कहते हैं कि हे शेख तकी तुमने तबक (सृष्टि) नहीं समझा और अपने गर्व में
बराबर बेहोश तथा गाफिल (भयग्रस्त) होता रहा। जिसने तुम्हें जन्म दिया है, इस दोस्त ईश्वर को तुमने
पहचाना नहीं॥
॥ दोहा॥
तकी दीन तुलसी लखा, दीन्हा पंथ लखाइ।
सुरति सैल असमान कर, चढ़े गगन को धाइ॥