गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished186 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 95ब्रह्म बेदी ८७
ब्रह्म बेदी ८७
सहसकमलदल आप साहब ज्यूँ फूलन मध गंध है।
पूर रहा जगदीस जोगी सत समरथ निरबंध है ॥ ८ ॥
मीन खोज¹ हनोज² हर दम उलट पंथ की बाट है।
इला पिंगला सुखमन खोजो चल हंस औघट घाट है ॥ ९ ॥
ऐसा जोग बिजोग बरनौ जो संकर ने चित धरा।
कुंभक रेचक द्वादस पलटै काल करम तिस तें डरा ॥१०॥
सुन्न सिंघासन अमर आसन अलख पुरुष निर्बान है।
अति लोलीन बेदीन मालिक कादिर कूँ कुरबान है ॥११॥
है नरसिंघ अबंध अवगत कोट बैकुंठ नख रूप है।
अपरंपार दीदार दरसन ऐसा अजब अनूप है ॥१२॥
घुरै निसान अखंड धुन सुन सोहं बेदी गाइये।
बाजै नाद अगाध अगहै जहँ ले मन ठहराइये ॥१३॥
सुरत निरत मन पवन लपटै बंकनाल सम कीजिये।
स्रवै³ फूल अस्थूल अस्थिर अमी महारस पीजिये ॥१४॥
सतपुरी मेरुडंड खोजो मन मनसा गहि राखिये।
उड़िहैं भँवर अकास गमनं पाँच पसीसो नाखिये⁴ ॥१५॥
गगन मँडल की सैल करले बहुर न ऐसा दाव है।
चल हंसा परलोक पठाऊँ भवसागर नहिं आव है ॥१६॥
कंदर्प⁵ जीत उदीत⁶ जोगी षटकर्मी यह खेल है।
अनुभव मालिन यह हार गूँधै सुरत निरत का मेल है ॥१७॥
सोहं जाप अथाप थरपौ त्रिकुटी संजम धुन लगै।
मान सरोवर न्हान हंसा गंग सहसमुख जित बहै ॥१८॥
कालिन्द्री कुरबान कादिर अवगत मूरत खूब है।
छत्र सेत बिसाल लोचन गलताना महबूब है ॥१९॥
(१) मछली की राह जिसका निशान नहीं होता। (२) सदा। (३) चुवै। (४)
रोकिये। (५) कामदेव। (६) प्रकाशमान।