गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 91, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ेंसाध महिमा का अंग ८३
संत की महिमा कही न जाय ।
अठसठ तीरथ चरनों माँय ॥ २ ॥
संत की महिमा अपरम्पार ।
पूरन ब्रह्म मिले करतार ॥ ३ ॥
संत की महिमा अगम अगाध ।
नारद से उधरे प्रहलाद¹ ॥ ४ ॥
ध्रु भेंटे नारद निर्बान ।
अमरापुर पर रचे बिमान¹ ॥ ५ ॥
संत की महिमा अगम अगाह ।
बूड़न तें राखे गज ग्राह² ॥ ६ ॥
संत की महिमा निश्चल थीर ।
द्रोपद सुता की बढ़ गई चीर³ ॥ ७ ॥
संत की महिमा अधिक सुमेर ।
भिलनी के जूठे खाये बेर४ ॥ ८ ॥
संत की महिमा निश्चल अंक ।
बालमीक का बाजा संख५ ॥ ६ ॥
संत की महिमा अमन अमान ।
देखो गनिका चढ़ी बिमान६ ॥१०॥
संत की महिमा पद गरगाप ।
तिरलोचन के बिर्तिया आप७ ॥११॥
पंडरपुर नामा निर्बान ।
देवल फेर छवा दई छान८ ॥१२॥
(१) प्रह्लाद भक्त की कथा नोट पृष्ठ ७३ में और ध्रू भक्त की नोट पृष्ठ २७ में
दी है । प्रह्लाद को गर्भ में और ध्रू को बन में नारद मुनि ने उपदेश दिया था ।
(२) देखो नोट पृष्ठ २० । (३) देखो नोट पृष्ठ २० । (४) सेवरी भिल्लिनी के दाँत से कुतर
कर चीखे हुए बेर श्री रामचन्द्र ने बड़ी रुचि से भोग लगाये । (५) देखो नोट पृष्ठ
५५-५६ । (६) देखो नोट पृष्ठ २० । (७) देखो नोट पृष्ठ ७३ । (८) पंडरपुर के ठाकुरद्वारे
का दरवाजा फिर जाने और नया छप्पर बन जाने का हाल नामदेव भक्त की कथा नोट
पृष्ठ ७१ में देखो ।