गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 76, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ गरीबदास जी की बानी
कहि न सुनावै और कूँ जो कुछ करै सो लीन१।
जाकी जरना देख कर संत भये बेदीन ॥५८॥
परचे कोट अनंत हैं अजमत२ कोट अनंत ।
कीमत कोट अनंत है जरना जोगोकंत ॥५६॥
कच्छ मच्छ बारह३ कुरम४ सेस धौल५ फन धार ।
ब्रह्मंड कोट अनंत है रोम रोम की लार ॥६०॥
एती लख जरना जरै कारन कवन अलेख ।
संत सूर जरना जरै कोइ हमरी जरना देख ॥६१॥
धौल गगन गिरनार६ है बसुधा७ ब्रह्म विलास ।
हमरी जरना देख कर बिस्नु लहै कोइ दास ॥६२॥
निरगुन सरगुन सब कला बहुरंगी बरियाम८ ।
पिंड ब्रह्मांड पूरन पुरुष अवगत रमता राम ॥६३॥
अनँत कला कलधूत९ हैं अनँत कला परवान ।
ऐसी जरना तू जरै धन कादिर१० कुरवान ॥६४॥
सब जानत है जगत गुरु कहि न सुनावै कोय ।
ऐसी जरना तू जरै नहीं किसी से होय ॥६५॥
जुगन जुगन के पाप सब जुगन जुगन के मैल ।
जानत है जगदीस तू जोर किये बद-फेल ॥६६॥
करमों कारन देख कर मौन रहे मुसताक ।
तेरी जरना देख कर संतों हासिल हाथ ॥६७॥
जरना बड़ जाजुल्ल११ है जरना नाद समोय ।
ऐसी जरना सो जरै जा तन सीस न होय ॥६८॥
(१) गुप्त । (२) करामात । (३) बाराह । (४) कुरम और कच्छ दोनों एक ही हैं
ज्यादा "दिग्गज" का शब्द लगता है क्योंकि आठों दिशा के गज और शेष नाग पृथ्वी
को सम्हाले हुए हैं। (५) सफेद । (६) नाम पहाड़ का जिस पर बहुत से सिद्ध रहते हैं ।
(७) पृथ्वी । (८) वरीयान = सब से श्रेष्ठ । (६) निर्दोष । (१०) शक्तिमान । (११) खूब
जलता हुआ।