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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 73

जरना का अंग ६५
जरना पूरन ब्रह्म है जरना करता आप।
जो कछु लखै सो सब जरै जरना है गरगाप ॥२४॥
जरै सो अछै निरंजन कहिये जरै सकल में देव।
जरना जोगी गुरमुखी जरना अलख अभेव ॥२५॥
जरना जोगी जुग जुग जिवै जरना प्रलय न जाय।
जरना जोगी जगतगुरु पद में रहै समाय ॥२६॥
जरना जोगी जुगजुग जिवै जरना प्रलय न होय।
जरना जोगी जगतगुरु सब्द समाना सोय ॥२७॥
कसनी कसै कपूर ज्यों करनी करै करार।
जरना जोगी जगतगुरु आप तरै जग तार ॥२८॥
सिंघ साध का एक मत जीवत ही कूँ खायँ।
यह जग मुरद-फरोस१ है पर द्वारे नहिं जायँ ॥२६॥
सिंघ साध का एक मत भच्छन करें बिचार।
यह जग मुरद फरोस है जाहिं न आन दुआर ॥३०॥
ऐसी जरना चाहिये ज्यों अललपच्छ के अंग।
अंडा छुटै अकास तें बहुर मिलै सतसंग२ ॥३१॥
ऐसी जरना चाहिये ज्यों अललपच्छ के होय।
सतसंगत सेवत रहा बिछुर गया दिन दोय२ ॥३२॥
ऐसी जरना चाहिये ज्यों चन्दन के अंग।
मुख से कछू न कहत है तन कूँ खात भुवंग ॥३३॥
(१) मुर्दा-परस्त याने मुर्दा पूजने वाले से मतलब है। (२) एक चिड़िया जिसकी
निस्बत कहा जाता है कि वह इतने ऊँचे आकाश में रहती है कि वहाँ जब अंडा देती
है तो रास्ते में वायुमंडल की रगड़ से अंडा सेय जाता है और बच्चा पैदा होकर पृथ्वी
पर पहुँचने के पहिले उसके पंख जम आते हैं और वह रास्ते ही से अपने माता पिता
की संगत में लौट जाता है।