गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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दीठी अनदीठी करें सब अपने सिर लेहिं ।
सँग से कभी न बिच्छूरूँ जो मुझ सरबस देहिं ॥१२॥
दीठी अनदीठी करें जिन के हूँ मैं संग ।
भक्ति पुरातम देत हैं चढ़त नवेला रंग ॥१३॥
दीठी अनदीठी करें जिनके हूँ मैं साथ ।
भक्ति पुरातम देत हैं पीड़ा लगै न गात ॥१४॥
दीठी अनदीठी करें जिनके हूँ मैं तीर ।
बजर टूटते राखहीं पीड़ा नहीं सरीर ॥१५॥
दीठी अनदीठी करें सो साधू परबीन ।
नाम रते निरबंध हैं छाँड़े दोनों दीन ॥१६॥
दीठी अनदीठी करें सो साधू सिर-पोस ।
जो बीतै सो सिर धरैं देहिं न काहू दोस ॥१७॥
दीठी कूँ कहि देत हैं जिनके दिल नहिं थीर ।
ता के सँग हम ना रहें सो कुट्टन बेपीर ॥१८॥
जरना जोगी जगतगुरु जरना है जगदीस ।
जरना आप अलेख है राखो अपने सीस ॥१६॥
जरना जोगी जगतगुरु जरना अलह अलेख ।
जरना कभी न डिगमिगै जरना निःचल देख ॥२०॥
जरना जोगी जगतगुरु जरना आप करीम ।
जरना हमरे उर बसै जम नहिं चंपै सीम¹ ॥२१॥
जरना जोगी जगतगुरु जरना अलख अलाह ।
जरना कूँ कुरबान जाँ जरना बेपरवाह ॥२२॥
जरना जोगी जगतगुरु जरना रमता राम ।
जरना कूँ कुरबान जाँ जरना है निःकाम ॥२३॥
(१ जम अपनी सीमा याने हद पर नहीं रोक सकता ।