गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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५६ गरीबदास जी की बानी
भेखों के लसकर फिरैं बानी चोर कठोर ।
सतगुर धाम न परसहीँ चौरासी के ढोर१ ॥२७॥
पारंगत२ परिचय नहीं बानी कहै बनाय ।
धरमराय दरगह३ सड़ै झूठा लतरी४ खाय ॥२८॥
कपटी कूँ भावै नहीं भगित मुक्ति की रीत ।
झूठा लंगर फिरत है साधों टोहत सीत५ ॥२६॥
साँचे सूरे संत हैं मरदाने जूझार६ ।
लाख दोस ब्यापै नहीं एक नाम की लार ॥३०॥
सत्त सुकृत अरु बंदगी जा उर ज्ञान विवेक ।
साध रूप साँईं मिले पूरन ब्रह्म अलेख ॥३१॥
सत्त सुकृत संतोप सर आधीनी अधिकार ।
दया धरम जा उर बसै सो साँईं दीदार ॥३२॥
आदि अंत मध संत हैं रंचक झूठ जहान ।
कपटी जुग जुग कपट है लख चौरासी खान ॥३३॥
साँचे कूँ संका नहीं झूठे भय घर माहिं ।