सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 186 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 61

साँच का अंग ५३
॥ साँच का अंग ॥
साँचा सतगुरु जो मिलै हंसा पावै थीर।
झकझोले जूनी मिटै मुरसिद गहिर गंभीर ॥ १ ॥
साँचे कूँ तो साँच है कूड़े कूँ है कूड़।
बैल होत कंगाल का गल में पहरे जूड़ ॥ २ ॥
साँचे कूँ परनाम है झूठे के सिर दंड।
ठौर नहीं तिहुँ लोक में भरमत है नौ खंड ॥ ३ ॥
साँचे का सेवन करो झूठे कूँ ले लूट।
साँच सब्द सूँ यों डरै ज्यों स्याने की मूठ१ ॥ ४ ॥
साँचे का सुमिरन करो झूठे द्यो जंजाल।
साँचा साहब आप है झूठ कपट सब काल ॥ ५ ॥
साँचे के चरनों लगो झूठे का ल्यो सीस।
साँच सकल में रहेगा झूठ न बिस्वे बीस ॥ ६ ॥
साँचे कूँ सब सौंप द्यो भगित बंदगी नाम।
झूठा कपटी मारिये हमरे कौने काम ॥ ७ ॥
साँचे कूँ स्वर्गापुरी झूठा दोजख माहिं।
चंद सूर की आयु२ लग दोजख निकसै नाहिं ॥ ८ ॥
साँचे संकर रीझहीं ब्रह्मा जोड़ैं प्रीत।
बिसनू करैं प्रतिपाल हद३ सकल संत संगीत ॥ ६ ॥
साहब जिन्ह के उर बसै झूठ कपट नहिं अंग।
तिन्हका दरसन न्हान है कहँ परबी फिर गङ्ग ॥१०॥
साँचे के सन्मुख रहो झूठे सूँ क्या नेह।
संख जुगन जुग परैगी झूठे के मुख खेह ॥११॥
झूठा सब संसार है साँचा है सो एक।
पारब्रह्म सतपुरुष पद सब वसुधा४ की टेक ॥१२॥
(१) गुनी के जादू का बान। (२) आयुर्दाय। (३) बहुत। (४) पृथ्वी।
८