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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

लै का अंग ५१
लै लागी तब जानिये जग सूँ रहै उदास ।
नाम रटै निरदुंद होय अनहदपुर में बास ॥ २ ॥
लै लागी तब जानिये हरदम नाम उचार ।
एकै मन एकै दिसा साँई के दरबार ॥ ३ ॥
लै लागी तबै जानिये हरदम नाम उचार ।
एकै मन एकै दिसा खड़ा रहै दरबार ॥ ४ ॥
लै लागी तब जानिये हर दम नाम उचार ।
धीरे धीरे होयगा वह अल्लह दीदार ॥ ५ ॥
लै लागी तब जानिये हर दम नाम हनोज ।
बिकट पंथ पावै नहीं मौनी केसा खोज १॥ ६ ॥
लै लागी तब जानिये हर दम नाम हनोज ।
मैं मेरी कूँ पटक दे सिर से डारो बोझ ॥ ७ ॥
लै लागी तब जानिये लै की लगै दुकान ।
ले लँगर २ सौदा करै छाँड़ महातम मान ॥ ८ ॥
लै लागी तब जानिये लै की लगै दुकान ।
बखत परे सौदा करै कोठे डारै ज्ञान ३ ॥ ९ ॥
महँगा सस्ता देख ले सौदा करै बिचार ।
दुगुने तिगुने चौगुने करिहै साहूकार ॥ १०॥
महँगा सस्ता देख ले सौदा करै समोय ४।
दूने तिगुने चौगुने कर ले जाता कोय ॥ ११॥
पूँजी साहूकार की बंजारा संसार ।
पूँजी माल गँवाइया नाहक बहै बिगार ॥ १२॥
ये पुरपट्टन ये गली बहुरि न देखै आय ।
सतगुरु सूँ सौदा हुआ भर ले माल अघाय ॥ १३॥
(१) जैसे गूँगा किसी बेजाने हुए स्थान या मनुष्य की खोज में सैन से पूछै तो पता
नहीं लग सकता । (२ खैरात-खाना । (३) कोठे पर ज्ञान को पटक दे । (४) घुस कर ।