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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 186 में से

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पृष्ठ 49

नग फूटा बिकता नहीं सारा लीजै सोध ।
हीरा पत्थर में बसै धन धरती ले खोद ॥९॥
कदली माँह कपूर है गज मोती अँदरून ।
चुभक चिड़ैया चोंच भर पैठे गज नाखून ॥१०॥
यौ तो सतसँग तुझ कहा कुसँग कहूँ भय भीत ।
स्वाँति पड़े जो सरप मुख करता जहर अनीति ॥११॥
भूम पड़े जैसा फलै सुर की संगत कीन ।
नीचन मुख नहि देखना ना कोइ मिलै कुलीन ॥१२॥
लोहे चुम्बक प्रीतड़ी¹ दोनौँ जड़ जगदीस ।
चेतन चेतन तें मिलै ल्हीस मिलत है ल्हीस ॥१३॥
रूमी² बस्तर अंतरा लोहा पारस बीच ।
चार जुगन मेला नहीं रहते निकट नगीच ॥१४॥
ऐसा नीच न जान दे साहब के दरबार ।
समझत नहिं अज्ञान बुध लग रहे करम लगार ॥१५॥
करम भरम भारी लगे मनसा चंचल चाव ।
बुध बेधै नहिं सुरत सत महल न लगे लगाव ॥१६॥
पिंग