गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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४६ गरीबदास जी की बानी
ज्यों कुंजर सिर धुनत है अगला१ जनम सुभंत ।
अबकी हेले२ नर करे तो सेऊँ पूरे संत ॥१८॥
राज दुवारे जाय कर रापत३ रोवै काहि ।
पग जंजीर न डारिये कजली बन कूँ जाहि ॥१९॥
सीस महावत बसत है अंकुस मोड़ समोड़ ।
बचन फिरत है पलक में साँईं नहीं लोड़४ ॥२०॥
ऐसा हाफिज५ फील है रहत गयंद गियान ।
राज दुवारे बन्धिया बिन साँईं के ध्यान६ ॥२१॥
सुन्न समुद जो मन रहै तो नहि भरमै प्रान ।
अरस कुरस से भिन्न है देखे अकल अमान ॥२२॥
सुन्न सरोवर सिखर सर सूभर७ तालम ताल ।
मन मरजीया छोड़िये लावै हीरा लाल ॥२३॥
सुन्न सरोवर सैर कर गगन उड़ाना मन्न ।
अगम भूमि भूलै नहीं लावै नाम रतन ॥२४॥
सुन्न सिखर संगत करै मूलै खोज न पंथ ।