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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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बिनती का अंग ३३
ओं अरु सोहं सार है मूल फूल परबेस ।
सिव ब्रह्मादिक रटत हैं ध्यान धरत है सेस ॥३२॥
मैं समरथ के आसरे दमक दमक करतार ।
गफ़लत मेरी दूर कर खड़ा रहूँ दरबार ॥३३॥
सुनो पुरुष मेरी बीनती साहब दीन-दयाल ।
पतित-उधारन साइयाँ तुम हो नजर निहाल ॥३४॥
समरथ का सरना लिया ताहि न चाँपै काल ।
पारब्रह्म का ध्यान धर होत न बाँका बाल ॥३५॥
नागदमन¹ निरगुन जड़ी ऐसा तुम्हरा नाम ।
तच्छक तीछा डरत है हर दम जप ले नाम ॥३६॥
आतम इंद्री कारने मत भटकावै मोहिं ।
जगन्नाथ जगदीस गुरु सरना आया तोहिं ॥३७॥
चरन कमल के ध्यान से कोटि बिघन टल जाहिं ।
राजा होवै लोक का जहाँ परै हुम² छाँहि ॥३८॥
हुमा छाँह जा पर परै पिरथी-नाथ कहाय ।
पसु पंछी आदम सबै सनमुख परखै ताय ॥३६॥
दिब्य-दृष्टि देवा दयाल सतगुरु संत सुजान ।
तिरलोकी के जीव कूँ परख लेत परवान ॥४०॥
अगले पिछले जन्म कूँ जानत है जगदीस ।
मुंडमाल सिव के गले पहिर रहे ज्यों ईस³ ॥४१॥
करुनामई करीम जप अलह अलख का ध्यान ।
सत्त पुरुष सुख सिंधु में जपत समाने प्रान ॥४२॥
दम सूँ दम कूँ समझ ले उठत बैठ आराध ।
रंचक ध्यान समान सुध पूरन सकल मुराद ॥४३॥
(१) नाम साँप की जड़ी का । (४) हुमा चिड़िया जिसकी निसबत कहते हैं कि उसका
साया पड़ने से आदमी बादशाह हो जाता है । (३) एक समय पारवती जी ने शिवजी से
पूछा कि यह मुंडमाल जो आप पहिने हुए हैं उसमें किन किन के सिर हैं । शिव जी