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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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३३ गरीबदास जी की बानी
साहब तेरी साहबी कहा कहूँ करतार ।
पलक पलक की दीठ में पूरन ब्रह्म हमार ॥१९॥
एते करता कहाँ हैं वह तो साहब एक ।
जैसे फूटी आरसी टूक टूक में देख ॥२०॥
करौं बीनती बंदगी साहब पुरुष सुभान१ ।
संख असंखों बरन है कैसे रचा जहान ॥२१॥
साहब तेरी साहबी समझ परै नहिँ मोहिँ ।
एता रूप जहान जग कैसे सिरजा तोहिँ ॥२२॥
एक बीज इक बिंदु है एक महल इक द्वार ।
चरन कमल कुरबान जाँ सिरजे रूप अपार ॥२३॥
मौला जल से थल करै थल से जल कर देत ।
साहब तेरी साहबी स्याम कहूँ की सेत ॥२४॥
साहब मेरा मिहरबाँ सुनिये अरस अवाज ।
पंजा राखो सीस पर जसहीँ होत तिरास ॥२५॥
मादर पिदर परान तँू साहब समरथ आप ।
रोम रोम धुन होत है सब्द सिंधु परकास ॥२६॥