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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 38

३० गरीबदास जी की बानी
अमर अनूपम आप है और सकल है खंड।
सूच्छम से सूच्छम मही पूरन पद परचंड ॥२०॥
अधम उधारन भगित है अधम उधारन नाँव।
अधम उधारन संत हैं जिनके मैं बल जावँ ॥२१॥
गज गनिका अरु भीलनी सेवरी प्रेम सहेत।
केते पतित उधारिया सतगुरु गावै नेत ॥२२॥
राम रसायन पीजिये यहि औसर यहि दाव।
फिर पीछे पछतायगा चला चली हो जाव ॥२३॥
राम रसायन पीजिये चोखा फूल चुवाय।
सुन्न सरोवर हंस मन पीया प्रेम अघाय ॥२४॥
कहता दास गरीब है बाँदी-जाद१ गुलाम।
तुम हो तैसी कीजिये भक्ति हिरंबर नाम ॥२५॥
॥ बिनती का अंग॥
साहब मेरी बीनती सुनो गरीब निवाज।
जल की बूँद महल रचा भला बनाया साज ॥ १ ॥
साहब मेरी बीनती सुनिये अर्स अवाज।
मादर पिदर करीम तू पुत्र पिता को लाज ॥ २ ॥
साहब मेरी बीनती कर जोरैं करतार।
तन मन धन कुरबान है दीजै मोहिं दीदार ॥ ३ ॥
पाँच तत्त के महल में नौ तत का इक और।
नौ तत से इक अगम है पारब्रह्म की पौर ॥ ४ ॥
सुरत निरत मन पवन कूँ करो एकत्तर२ यार।
द्वादस उलट समोय ले दिल अंदर दीदार ॥ ५ ॥
चार पदारथ महल में सुरत निरत मन पौन।
सिव द्वारा खुलि है जबै दरसै चौदह भौन ॥ ६ ॥
(१) ख़ानाज़ाद् । (२) इकट्ठा ।