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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 169

राग विलावल १५६

बिन पर भँवर उड़ाइया, बिन पगों१ पयाना२ ।
दास गरीब अगमपुरी, जहँ ज्ञान न ध्याना ॥१२॥
( ५ )
मैं अमली निज नाम का, मद खूब चुवाया ।
पिया पियाला प्रेम का, सिर साँटे३ पाया ॥ टेक ॥
गन गंधर्प जोधा बड़े, कैसे ठहराया ।
सील खेत रन जंग में, सतगुरु सर४ लाया ॥ १ ॥
पाँच सखी नित संग हैं, कैसे हैं त्यागी ।
अमर लोक अनहद रते, सोई अनुरागी ॥ २ ॥
परपंची पाकर५ लिया, बिरहे का कंपा६ ।
जहँ संख पद्म उजियार है, भलकल है चंपा ॥ ३ ॥
कुंभ७ कलाली भर दिया, महँगा मद नीका ।
और अमल नापाक है, सब लागत फीका ॥ ४ ॥
एक रती पावे नहीं, बिन सीस चढ़ाये ।
वह साहब राजी नहीं, नर मुंड मुड़ाये ॥ ५ ॥
नौधा के नर बहुत हैं, बैकुंठ सिधौरा८ ।
सुकिरत नाम सँभालियो, लूटत जम जौरा ॥ ६ ॥
सुकिरत नाम समीप है, सिव गौर सुनाया ।
सुवटे से सुकदे हुआ, पारस पद पाया९ ॥ ७ ॥
रंग महल में रोसनी, रमते से मेला ।
परसा दास गरीब है, सतगुरु का चेला ॥ ८ ॥
( ६ )
आज का लाहा लीजिये, कल्ह किस कूँ होई ।
यह तन माटी में मिलै, जानै सब कोई ॥ टेक ॥

(१) पांव । (२) चलाना । (३) बदले में यानी सिर देकर । (४) बान । (५) पकड़ ।
(६) चिड़िया फँसाने की तीलियाँ । (७) घड़ा । (८) जाने वाले । (९) देखो कथा नोट
पृष्ठ ७८ ।