गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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आठो बखत अल्हैया¹ बाजै, होता सब्द टँकोरा ।
गरीबदास यूँ ध्यान लगावै, जैसे चंद चकोरा ॥१०॥
( २ )
बँगला सोई सत्त परवान, तामें पारब्रह्म का ध्यान ॥टेक॥
साढ़े तीन करोड़ बृच्छ² हैं, या बँगले के पासा ।
सालेमार सरीर सरोवर, नौ लख बाग खुलासा ॥ १ ॥
या बँगले के आगे कूआ, उरध-मुखी महमंता ।
मनुवा माली वारे ढारै, आठो बखत चलंता ॥ २ ॥
इला पिंगला मद्ध सुखमना, ता पर एक सुराही ।
अमी महारस छाक परी है, पीवत होय रुसनाई ॥ ३ ॥
रोसन तकिये रास होत है, बाजे बजैं अपारा ।
पाँचौं इन्द्री अस्थिर होई, घूमै मन मतवारा ॥ ४ ॥
संखौं कमल कलस की नाईं, सेत भमर झनकारैं ।
कोयल मोर पपीहा बोलैं, दादुर अधिक गुंजारैं ॥ ५ ॥
बीना ताल पर पखावज बाजै, गावै गंधर्प रागी ।
सिव की तहाँ समाध लगी है, चीन्ह पड़ी बड़ भागी ॥ ६ ॥
ध्रू प्रहलाद और नाम³ कबीरा, नारद सुकदे व्यासा ।
गोरख दत्त भये गलताना, देखा अजब तमासा ॥ ७ ॥
ब्रह्मा बिस्नु महेसर सेसा, ररंकार धुन होई ।
गुफ⁴ बीरज⁵ यह मंत्र जो दीन्हा, राख सब्द कूँ गोई⁴ ॥ ८ ॥
मान सरोवर ऊपर बँगला, जहँ हंस परमहंस खेलै ।
गरीबदास भवसागर सेती, पूरा सतगुरु बेलै⁶ ॥ ६ ॥
( ३ )
बँगला सोई सत्त निज सार, जा में पारब्रह्म दीदार ॥टेक॥
(१) एक रागिनी का नाम । यहां अनहद धुन से मतलब है । (२) रोम (रोआँ) की
गिनती शास्त्रों में साढ़े तीन करोड़ लिखी है । (३) नाम देव । (४) गुप्त । (५) बीज मंत्र
ओंकार शब्द का नाम है । (६) उबारै ।