गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 124, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ें११४ गरीबदास जी की बानी
जिकर फिकर फरियाद कर ले, अंदरूनी अरस वे ।
हाली मवाली १ याद कीजे, ना सरे में तरस वे ॥ २ ॥
रसना रँगीली राम जप ले, अलख कादिर आप वे ।
पीराँ फकीराँ परस ले, पूजो सनेही साध वे ॥ ३ ॥
दरगह मिटै जो डंड तेरा, नेकी निरंतर राख वे ।
नापैद से पैदा किया, तूँ नाम बिन नापाक वे ॥ ४ ॥
दिल सफा कर सैलान कीजै, बंक मारग बाट वे ।
इला पिंगला सुषमना, तूँ उतर औघट घाट वे ॥ ५ ॥
बंक नाल बिसाल बहना, है अमी रस अरस वे ।
रसना बिहूना २ राग गावे, बिना चसमों दरस वे ॥ ६ ॥
प्याला अमी रस पीजिये, खुलिहै बजर कपाट वे ।
अरस कुरस अबंध अवगत, कोल्हू चवै बिन लांट ३ वे ॥ ७ ॥
निरभै निरन्तर नेम रख, अकला ४ अनाहद रात वे ।
मुकता मुलायम याद साहब, दूर कर दिल घात वे ॥ ८ ॥
जोगी बिजोगी बिंद रख ५, सुन में समाना सिंध वे ।
हाजिर गुलाम गरीब है, सोलह कला रबि चंद वे ॥ ६ ॥
( ३ )
बंदे देख ले दरहाल वे ।
सुन्न मंडल सैल करले, अजब गैबी ख्याल वे ॥ १ ॥
जबरूत ६ पर नासूत ६ है, नासूत पर मलकूत ६ वे ।
मलकूत पर लाहूत ६ है, लाहूत पर अनभूत ६ वे ॥ २ ॥
सुन ले सोहंसो जाप कूँ, सुन ६ में सिलहरा बाँध वे ।
सेस के सिर ध्यान धरिये, उलट स्वर कूँ साध वे ॥ ३ ॥
तीन मूरत निरख निःचल, पैठ देख पताल वे ।
(१) दर्बारी, प्रेमीजन । (२) बिना । (३) बिना जाठ के कोल्हू टपकता है।
(४) अँधेरी । (५) जो बीर्य्य को पात न होने दे । (६) अंतरी मुकामों के नाम ।