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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 186 में से

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पृष्ठ 123

सोहं साछीभूत न ईसर कोय रे।
हरे हाँ रे कहता दास गरीब धनी कूँ जोह रे ॥ ७ ॥
॥ बैत ॥
बंदे जान साहब सार वे ।
पिदर१ मादर२ आप कादर३, नहीं कुल परिवार वे ॥ १ ॥
जल बूँद से जिन साज साजा, लहम४ दरिया नूर वे ।
है सकल सरबंग साहब, देख निकट न दूर वे ॥ २ ॥
जिन्द५ अजूनी बेनमूनी, जागता गुरु पीर वे ।
उलट पट्टन मेरु चढ़ना, लहम दरिया तीर वे ॥ ३ ॥
अजब साहब है सुभानं, खोज दम का कीन वे ।
तिर्कुटी के घाट चढ़ कर, ध्यान धर दुरबीन वे ॥ ४ ॥
अजब दरिया है हिरंबर६, परम हंस पिछान वे ।
आब खाक न बाद आतिस७, ना जमीं असमान वे ॥ ५ ॥
अलख आप अलाह साहब, कुर्स कुंज जहूर वे ।
अर्स ऊपर महल मालिक, दर झिलमिला नूर वे ॥ ६ ॥
मौला करीम खुदाय खूबी, धुन सोहंसो जाप वे ।
बाँग रोज निमाज कलमा, है सबद गरगाप वे ॥ ७ ॥
निर्भय निहंगम८ नाद बाजै, निरख कर टुक देख वे ।
अरसी अजूनी जिंद जोगी, अलख आदि अलेख वे ॥ ८ ॥
मढ़ी महल न तासु के, आसन अचंभी ऐन वे ।
पाजी गुलाम गरीब तेरा, देखता सुख चैन वे ॥ ६ ॥
( २ )
बंदे खोज पैंड़ा पकर वे ।
लेखा सरे६ में लीजियेगा, कर धनी का जिकर वे ॥ १ ॥
(१) बाप । (२) मा । (३) शक्तिमान । (४) छिन में । (५) जिन्दा, जीता जागता ।
(६) निर्मल । (७) पानी, मिट्टी, हवा, आग । (८) निःअहंकार, मतवाला । (६) दरबार
(शरअ ?) ।