गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअरिल १०७
( ७ )
मरदाने मर जाहि मनी पर मार है।
ऐसा महल अनूप पलक में छार है ॥ १ ॥
जोरा१ बुरी बलाय जीव जग मूँच२ है।
पलक पहर छिन माहिं नगारा कूँच है ॥ २ ॥
सुरत सुहंगम नेस पेस है बावरे ।
बदी विदारो३ बेग धनी कूँ ध्याव रे ॥ ३ ॥
दम की डोरा खोज दरीबा४ खूब है।
अगर दीप सतलोक अजब महबूब है ॥ ४ ॥
सुता५ पुत्र गृह नार छार सब गात रे।
का सँू लाया नेह संग नहिं साथ रे ॥ ५ ॥
हंस अकेला जाय हिरंबर हेत रे।
सब्द हमारा मान नाम निज चेत रे ॥ ६ ॥
कोतल घोड़े पीनस६ रथ सँग पालकी ।
गज गैबर७ दल ठाठ निसानी काल की ॥ ७ ॥
हक हलाल पहिचान बदी कर दूर रे।
यह मुरगी रब रूह गऊ क्या सूर८ रे ॥ ८ ॥
तीतर चिड़ी बटेर भखे हलवान रे ।
मुल्ला बाँग पुकार अलह रहमान रे ॥ ६ ॥
रमजानी रमजान घास चोखा दिया ।
पकड़ पच्छाड़ी रूह कहो यह क्या किया ॥१०॥
खूनी खून मँझार खाल क्यूँ काढ़ता ।
देखे रब रहमान गला क्यूँ बाढ़ता६ ॥११॥
(१) जुल्म । (२) गँवार। (३) फाड़ डालो, नाश करो। (४) झोपड़ा ।
(५) बेटी। (६) एक तरह की छोटी पालकी। (७) हाथियों का झुण्ड। (८) सूअर ।
(६) काटता ।