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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 333, कुल 421 में से

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पृष्ठ 333

-९. ४४ ] छायाव्यवहारः [ २७९
अत्रोद्देशकः
शङ्कुप्रदीपयोर्मध्यं षण्णवत्यङ्गुलानि हि ।
द्वादशाङ्गुलशङ्कोस्तु दीपच्छायां वदाशु मे षष्टिर्दीपशिखोत्सेधो गणितार्णवपारग ॥ ४२ ॥
दीपशङ्क्वन्तरानयनसूत्रम्—
शङ्कुनितदीपोन्नतिराप्ता शङ्कुप्रमाणेन ।
तल्लब्धहता शङ्कुच्छाया शङ्कुप्रदीपमध्यं स्यात् ॥ ४३ ॥
अत्रोद्देशकः
शङ्कुच्छायाङ्गुलान्यष्टौ षष्टिर्दीपशिखोदयः ।
शङ्कुदीपान्तरं ब्रूहि गणितार्णवपारग ॥ ४४ ॥
दीपोन्नतिसंख्यानयनसूत्रम्—
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उदाहरणार्थ प्रश्न
किसी शंकु और दीपक की क्षैतिज दूरी वास्तव में ९६ अंगुल है । दीपक की लौ की ऊँचाई
जमीन से ६० अंगुल है । हे गणितार्णव (गणित समुद्र) के पारगामी, मुझे शीघ्र ही १२ अंगुल
ऊँचे शंकु के संबंध में दीपक की लौ के कारण उत्पन्न होने वाली छाया का माप बतलाओ ॥ ४१½-४२ ॥
दीपक और शंकु के क्षैतिज अंतर को प्राप्त करने के लिए नियम—
(जमीन से) दीपक की ऊँचाई को शंकु की ऊँचाई द्वारा ह्रासित किया जाता है । परिणामी
राशि को शंकु की ऊँचाई द्वारा भाजित करते हैं । शंकु की छाया के माप को, इस प्रकार प्राप्त भजनफल
द्वारा गुणित करने पर, दीपक और शंकु का क्षैतिज अंतर प्राप्त होता है ॥ ४३ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
शंकु की छाया की लंबाई ८ अंगुल है । दीप शिखा (दीपक की लौ) की (जमीन से)
ऊँचाई ६० अंगुल है । हे गणितार्णव के पारगामी, दीपक और शंकु के क्षैतिज अंतर के माप को
बतलाओ ॥ ४४ ॥
दीपक की (जमीन से ऊपर की) ऊँचाई के संख्यात्मक माप को प्राप्त करने के लिये नियम--
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माप है, 'अ' शंकु की ऊँचाई का माप है, ब' दीपक की ऊँचाई का माप है,
और 'स' दीपक तथा शंकु के बीच का क्षैतिज अंतर है ।
यह सूत्र पार्श्व में दी गई आकृति से स्पष्ट रूप से सिद्ध किया जा
सकता है ।
(४३) पिछली टिप्पणी में उपयोग में लाये गये प्रतीकों को ही उप-
योग में लाकर, इस नियमानुसार स = छ × (ब - अ) / अ होता है ।
(४४) अगले ४६-४७ वें श्लोकों के अनुसार शंकु की ऊँचाई का दिया गया माप १२
अंगुल है ।