गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 334, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें२८० ] गणितसारसंग्रहः [ ९. ४५-
शङ्कुच्छायाभक्तं प्रदीपशङ्क्वन्तरं सैकम् ।
शङ्कुप्रमाणगुणितं लब्धं दीपोन्नतिर्भवति ॥ ४५ ॥
अत्रोद्देशकः
शङ्कुच्छाया द्विनिघ्नैव द्विशतं शङ्कुदीपयोः ।
अन्तरं ह्यङ्गुलान्यत्र का दीपस्य समुन्नतिः ॥ ४६ ॥
शंकुप्रमाणमत्रापि द्वादशाङ्गुलकं गते ।
ज्ञात्वोदाहरणे सम्यग्विद्यात्सूत्रार्थपद्धतिम् ॥ ४७ ॥
पुरुषस्य पादच्छायां च तत्पादप्रमाणेन वृक्षच्छायां च ज्ञात्वा वृक्षोन्नतेः संख्यानयनस्य
च, वृक्षोन्नतिसंख्यां च पुरुषस्य पादच्छायायाः सङ्ख्यानयनस्य च सूत्रम्—
स्वच्छायया भक्तनिजेष्टवृक्षच्छाया पुनस्सप्तभिराहता सा ।
वृक्षोन्नतिः साद्रिहृता स्वपादच्छायाहता स्याद्द्रुमभैव नूनम् ॥ ४८ ॥
दीपक और शंकु के क्षैतिज अंतर के माप को, शंकु की छाया द्वारा भाजित किया जाता है ।
तब इस परिणामी भजनफल में एक जोड़ा जाता है । इस प्रकार प्राप्त राशि जब शंकु की ऊँचाई के
माप द्वारा गुणित की जाती है, तब दीपक की ( जमीन से ऊपर की ) ऊँचाई का माप उत्पन्न
होता है ॥ ४५ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
शंकु की छाया की लंबाई उसकी ऊँचाई से दुगुनी है । दीपक और शंकु की क्षैतिज दूरी का
माप २०० अंगुल है । इस दशा में दीपक की जमीन से ऊँचाई कितनी है ? इसी तथा गत प्रश्न में
शंकु की ऊँचाई १२ अंगुल लेकर नियम के साधन का अर्थ भलीभाँति सीख लेना चाहिये ॥ ४६-४७ ॥
जब मनुष्य की ( पाद प्रमाण में दी गई ) छाया की लंबाई का माप तथा ( उसी पाद प्रमाण
में दी गई ) वृक्ष की छाया की लंबाई का माप ज्ञात हों, तब उस वृक्ष की ऊँचाई का संख्यात्मक
माप निकालने के लिए नियम; साथ ही जब ( उसी पाद प्रमाण में ) वृक्ष की ऊँचाई का संख्यात्मक
माप तथा मनुष्य की छाया की लंबाई का संख्यात्मक माप ज्ञात हो, तब ( उसी पाद प्रमाण में ) वृक्ष
की छाया की लंबाई का संख्यात्मक माप निकालने के लिये नियम—
किसी व्यक्ति द्वारा चुने गये वृक्ष की छाया की लंबाई के माप को निज पाद प्रमाण में नापी
गई उसकी निज की छाया के माप द्वारा भाजित किया जाता है । इससे वृक्ष की ऊँचाई प्राप्त होती है ।
यह वृक्ष की ऊँचाई ७ द्वारा भाजित होकर और निज पाद प्रमाण में नापी गई निज की छाया द्वारा
गुणित होकर, निःसन्देह, वृक्ष की छाया की शुद्ध लंबाई के माप को उत्पन्न करती है ॥ ४८ ॥
( ४५ ) इसी प्रकार, ब = ( स/छ + १ ) अ
( ४८ ) यह नियम उपर्युक्त १२½ वें श्लोक के उत्तरार्द्ध में दिये गये नियम की विलोम दशा है ।
यहाँ दिये गये नियम में मनुष्य की ऊँचाई और उसके पाद माप के बीच का संबंध उपयोग में लाया
गया है ।