गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७८ ] गणितसारसंग्रहः [ ९. ३५-
कश्चिद्राजकुमारः प्रासादाभ्यन्तरस्थःसन् ।
पूर्वाह्ने जिज्ञासुर्दिनगतकालं नरच्छायाम् ॥ ३५ ॥
द्वात्रिंशद्धस्तोर्ध्वे जाले प्राग्भित्तिमध्य आयाता ।
रविभा पश्चाद्भित्तौ व्यकत्रिंशत्करोर्ध्वदेशस्था ॥ ३६ ॥
तद्भित्तिद्वयमध्यं चतुरुत्तरविंशतिः करास्तस्मिन् ।
काले दिनगतकालं नृच्छायां गणक विगणय्य ।
कथयच्छायागणिते यद्यस्ति परिश्रमस्तव चेत् ॥ ३७½ ॥
समचतुरश्रायां दशहस्तघनायां नरच्छाया ।
पुरुषोत्सेधद्विगुणा पूर्वाह्ने प्राक्तटच्छाया ॥ ३८½ ॥
तस्मिन् काले पश्चात्तटाश्रिता का भवेद्गणक ।
आरूढच्छायाया आनयनं वेत्सि चेत्कथय ॥ ३९½ ॥
शङ्कोर्दीपच्छायानयनसूत्रम्—
शङ्कूनितदीपोन्नतिराप्ता शङ्कुप्रमाणेन ।
तल्लब्धहृतं शङ्कोः प्रदीपशङ्क्वन्तरं छाया ॥ ४०½ ॥
ठहरा हुआ कोई राजकुमार पूर्वाह्न दिन में बीते हुए समय को ज्ञात करने का, तथा (मानवी ऊँचाई के
पदों में व्यक्त) मानवी छाया के माप को ज्ञात करने का इच्छुक था । तब सूर्य की रश्मि पूर्व की
ओर की दीवाल के मध्य में ३२ हस्त ऊँचाई पर स्थित खिड़की में से आकर, पश्चिम ओर की दीवाल
पर २९ हस्त की ऊँचाई तक पड़ी । उन दो दीवालों का अंतर २४ हस्त है । हे छाया प्रश्नों से भिज्ञ
गणितज्ञ, यदि तुमने छाया-प्रश्नों (से परिचित होने) में परिश्रम किया हो, तो (उस दिन) बीते
हुए दिन के समय का माप और उस समय (मानवी ऊँचाई के पदों में व्यक्त) मानवी छाया का
माप बतलाओ ॥ ३५-३७½ ॥
पूर्वाह्न समय मानवी छाया मानवी ऊँचाई से दुगुनी है । प्रत्येक विमिति में (dimension)
१० हस्त वाले वर्गाकार छेद के ऊर्ध्वाधर खात के संबंध में पूर्वी दीवाल से उत्पन्न, पश्चिमी दीवाल
पर पड़ने वाली की ऊँचाई क्या होगी ? हे गणितज्ञ, यदि जानते हो, तो बतलाओ की लंबरूप दीवाल
पर आरूढ छाया छाया का माप कितना होगा ? ॥ ३८½-३९½ ॥
किसी दीवाल के प्रकाश के कारण उत्पन्न होनेवाली शंकु की छाया को निकालने के लिये नियम:—
शंकु की ऊँचाई द्वारा हासित दीपक की ऊँचाई को शंकु की ऊँचाई द्वारा भाजित करना
चाहिये । यदि इस प्रकार प्राप्त भजनफल के द्वारा दीपक और शंकु के बीच की क्षैतिज दूरी को भाजित
किया जाय तो शंकु की छाया का माप उत्पन्न होता है ॥ ४०½ ॥
(३५-३७½) यह प्रश्न श्लोकों ८½ और २३ में दिये गये नियमों के विषय में है ।
(३८½-३९½) यह प्रश्न श्लोक २१ में दिये गये नियमानुसार हल किया जाता है ।
(४०½) बीजीय रूप से कथित नियम यह है:—छ = स ÷ (ब - अ)/अ , जहाँ 'छ' शंकु की छाया का