गदनिग्रह (आचार्य सोढल - कायचिकित्सा एवं रोग-विनिश्चय सटीक)
Gadanigraha of Acharya Sodhala with Commentary
आचार्य सोढल द्वारा
प्रारंभिक पृष्ठ एवं मंगलाचरण
BOMBAY:
PRINTED BY B. R. GHÂṆEKAR, AT THE "NIRNAYA-SÂGARA" PRE
23, KOLBHAT LANE, FOR THE PUBLISHER.
आयुर्वेदीयग्रन्थमाला
तृतीयं पुष्पम् ।
श्रीवैद्यसोढलविरचितं
गदनिग्रहः ।
( प्रथमः प्रयोगखण्डः । )
आचार्योपाह्वेन त्रिविक्रमात्मजेन यादवशर्मणा
संशोधितः
प्रकाशितश्च ।
सं. १९६७.
मूल्यं सार्धरूप्यकः ।
भूमिका।
———܀❖܀———
गदनिग्रहकर्ताऽयं सोढलवैद्यो गुर्जरदेशनिवासी, रायेकवालब्राह्मणो नन्दनतनयः,
वैद्यनन्दनपुत्रः, वत्सगोत्रोत्पन्नश्चेति तेन स्वविरचिते गुणसंग्रहापरपर्याये सोढ-
लनिघण्टुनाम्नि ग्रन्थे प्रोक्तादात्मवृत्तान्तात् प्रतीयते । स चायं सोढलवैद्यः क-
स्मिन् समये समजनीत्येतन्निर्णेंतुं न किंचिदपि साधनमुपलब्धमस्माभिः । सोढ-
लविरचितो गदनिग्रहव्यतिरिक्तो गुणसंग्रहापरपर्यायः सोढलनिघण्टुरिति प्रसि-
द्धोऽन्योऽपि ग्रन्थः समुपलभ्यते । तत्र धन्वन्तरिनिघण्टुराजनिघण्टुप्रभृतिष्वनु-
क्तानां प्रायो गुर्जरदेशप्रसिद्धानामेकशतद्रव्याणां नामानि सगुणान्यधिकान्युक्तानि ।
यद्यपि चिकित्साविषयकाश्चक्रदत्तवङ्गसेनरत्नाकरप्रभृतयो बहवो ग्रन्था
मुद्रितास्तथापि भूरिप्रयोगवत्वात्, सरलत्वाच्चायमेव सर्वानतिशेते । ग्रन्थेऽस्मिन्
प्रयोग-कायचिकित्सा-शालाक्य-शल्य-भूततन्त्र-बालतन्त्र-विषतन्त्र-रसायन-
वाजीकरण-पञ्चकर्माधिकाराख्या दश खण्डाः सन्ति । तत्र प्रथमे प्रयोगखण्डे
घृततैलचूर्णगुटीलेहासवाख्याः षडधिकारा विद्यन्ते । तेषु षट्स्वधिकारेषु पञ्चाशी-
त्यधिकपञ्चशतमिताः प्रत्यक्षफलप्रदाश्चिकित्सायां नित्योपयोगिनश्च प्रयोगरत्ना
उक्ताः । अत्रोक्तप्रयोगेषु बहवः प्रयोगा मुद्रितेषु चिकित्साग्रन्थेष्वनुक्ताः ।
अतोऽयं खण्डो वैद्यानां चिकित्सायामतीवोपयुक्तो भविष्यतीति पृथगेवायं प्रसिद्दी-
कृतः । ग्रन्थस्यास्य आदर्शपुस्तकद्वयमुपलब्धं; एकं अस्मत्परमसुहृदां स्वर्गवासिनां
वैद्यमुरारजीशर्मणां,अपरं च बुन्दीनगरनिवासिनां राजवैद्यानां श्रीप्रसादशर्मणाम् ।
प्रथमोपलब्धपुस्तकापेक्षया द्वितीयेऽनन्तरमुपलब्धे पुस्तके यः पाठ अधिक उप-
लब्धः स परिशिष्टे संनिवेशितः । घृततैलचूर्णगुटीलेहासवानां परिभाषाः सोढलेना-
नुक्ता अप्यस्माभिर्ग्रन्थान्ते संनिवेशिताः । ग्रन्थस्यास्य शुद्धीकरणी यथामति कृतो
यत्नः । तथापि भ्रमप्रमादादिवशाज्जातं स्खलनं क्वाप्युपलभ्येत चेत्सुधीभिः
संशोधनीयं क्षन्तव्यश्चाहं, सफलीकर्तव्यश्च ममायं प्रयासो ग्रन्थस्यास्य पठन-
पाठनपर्यालोचनादिनेति ॥
$\left.{l} सं. १९६८ कार्तिकशुक्ल ११.
कोट होलीचकला मुंबई. \right}$ \qquad\qquad \textbf{यादवशर्मा,}
१. रायकवालब्राह्मणानां वसतिः सांप्रतं गुर्जरदेश एवोपलभ्यते । २. यथा —
“वत्सगोत्रान्वयस्तत्र वैद्यनन्दननन्दनः । शिष्यः संघद्यालोश्च रायकवालवंशजः ॥
सोढलाख्यो भिषक् भानुपादपङ्कजषड्पदः । चकोरेमं चिकित्सायां समग्रं गुणसंग्र-
हम्—” इति ॥
गदनिग्राहन्तर्गतविषयानुक्रमणिका ।
| विषयः | पृ. | पं. | विषयः | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| मङ्गलाचरणम् | १ | ५ | उन्मादे ब्राह्मीघृतम् | १२ | ७ |
| ग्रन्थानुक्रमणिका | ,, | १६ | शूले बीजपूरकाद्यं घृतम् | ,, | १४ |
| घृताधिकारः प्रथमः । | व्रणे महागौर्याद्यं ,, | ,, | २१ | ||
| ज्वरे मञ्जिष्ठाद्यं घृतम् | ३ | ३ | रक्तपित्ते दूर्वाद्यं ,, | १३ | ४ |
| ,, द्वितीयं ,, | ,, | १२ | नेत्ररोगे महात्रैफलं घृतम् | ,, | १५ |
| ,, तिल्वकाद्यं ,, | ,, | २१ | वातव्याधौ शतावरीघृतम् | १४ | २ |
| जीर्णज्वरे कटुकं ,, | ४ | ३ | बाधिर्ये सारस्वतं घृतम् | ,, | १५ |
| अग्निमान्द्ये अग्निघृतम् | ,, | २० | सन्तानार्थे फलघृतम् | १५ | २ |
| ग्रहण्यां चाङ्गेरीघृतम् | ५ | ६ | क्षतक्षीणे श्वदंष्ट्राद्यं घृतम् | ,, | १९ |
| गुदभ्रंशे द्वितीयं ,, | ,, | १७ | कामलायां द्राक्षाद्यं ,, | १६ | २ |
| गुल्मे दाधिकं घृतम् | ,, | २४ | कुष्ठे महावज्रकं ,, | ,, | ६ |
| ,, हपुषाद्यं ,, | ६ | २ | ,, द्वितीयं ,, ,, | ,, | ९ |
| रक्तपित्ते वासाद्यं ,, | ,, | ९ | ,, तिक्तकाद्यं ,, | ,, | १४ |
| ,, महावासाद्यं ,, | ,, | १६ | ,, महातिक्तकं ,, | ,, | २३ |
| गुल्मे दशाङ्गं ,, | ,, | २५ | ,, द्वितीयं ,, ,, | १७ | १२ |
| ,, लशुनघृतम् | ७ | ४ | प्लीह्नि रोहितकं घृतम् | १८ | २ |
| ,, नाराचकं घृतम् | ,, | १४ | ,, बिल्वाद्यं ,, | ,, | १८ |
| कुष्ठे नलिनीघृतम् | ,, | २७ | सर्वोदरे द्विपञ्चमूलाद्यं,, | ,, | २३ |
| गुल्मे विश्वाद्यं घृतम् | ८ | ९ | उदरे ब्राह्मं ,, | १९ | २ |
| ,, षट्पलं ,, | ,, | १४ | कासे कण्टकारीघृतम् | ,, | ८ |
| ,, महाषट्पलं ,, | ,, | १९ | ,, द्वितीयं ,, | ,, | १३ |
| कुष्ठे नीलं | ,, | २७ | ,, त्र्यूषणाद्यं घृतम् | ,, | १८ |
| ,, महानीलं ,, | ९ | ११ | व्रणे गौर्याद्यं ,, | ,, | २७ |
| ,, त्रिफलाद्यं ,, | १० | ५ | ,, गुग्गुलुतिक्तकं ,, | २० | ८ |
| ,, आवर्तकीघृतत् | ,, | १२ | शोषे द्राक्षाद्यं ,, | ,, | २५ |
| गुदभ्रंशे चव्याद्यं घृतम् | ,, | २५ | नेत्ररोगे त्रिफलाद्यं ,, | २१ | ७ |
| प्रमेहे धान्वन्तरं ,, | ११ | ५ | ,, पटोलाद्यं ,, | ,, | २१ |
| बालरोगे कुमारकल्याणकं घृतम् | ,, | २० | उदरे बिन्दुघृतम् | २२ | ४ |
| गुल्मे महाबिन्दुघृतम् | ,, | ११ | |||
| ,, बिन्दुघृतम् | ,, | २३ |
२
विषयः पृ. पं. | विषयः पृ. पं.
गुल्मे द्वितीयं महाबिन्दुघृतम् २३ २ | वातव्याधौ चतुर्थं प्रसारणीतैलं ३७ २१
कुष्ठे बिन्दुघृतम् ,, ७ | वातरक्ते शतावरीतैलम् ३८ ८
,, पञ्चतिक्तकं घृतम् ,, १७ | वातव्याधौ द्वितीयं ,, ,, २०
शूले लशुनघृतम् ,, २४ | ,, रास्नातैलम् ३९ ५
पाण्डुरोगे दाडिमाद्यं घृतम् २४ ११ | ,, श्ताह्वातैलम् ,, २७
गुल्मे चित्रकाद्यं ,, ,, १८ | ,, मूलकतैलम् ४० ३
शोफे द्वितीयं ,, ,, २५ २ | ,, सहचरतैलम् ,, १७
प्लीह्नि तृतीयं रोहीतकघृतम् ,, ७ | ,, द्वितीयं ,, ४१ ५
कुष्ठे गुग्गुलुपञ्चतिक्तकं घृतम् ,, १४ | ,, श्योनाकतैलम् ,, १८
रक्तपित्ते शीतकल्याणकं ,, २६ ४ | सर्वाङ्गवातव्याधौ श्वदंष्ट्राद्यं
हिक्काश्वासे शम्याकं ,, ,, १८ | तैलम् ४२ १८
रसायनार्थे नारसिंहं ,, ,, २६ | वातरक्ते खुड्डाकपद्मकं ,, ४३ २
विषेऽमृतं ,, २७ १८ | ,, महापद्मकं ,, ,, ६
ग्रहण्यामभिघृतम् २८ ७ | ज्वरे तृतीयं ,, ,, १५
ग्रहण्यां भल्लातकाद्यं घृतम् ,, २२ | वातव्याधौ बृहन्माषतैलम् ४४ ६
जीर्णज्वरे पिप्पल्याद्यं ,, २९ ४ | बाहुरोगे लघुमाषतैलम् ,, २१
शिरोरोगे मायूरघृतम् ,, ११ | वातव्याधौ तृतीयं महामाष० ,, २६
तिमिरे जीवन्त्याद्यं घृतम् ३० ९ | ,, दशाङ्गतैलम् ४५ १२
अपस्मारे पञ्चगव्यं ,, ,, १५ | ऊरुस्तम्भे सैन्धवाद्यं तैलम् ४६ ४
ज्वरे महापञ्चगव्यं ,, २४ | वातरोगे कुसुम्भाद्यं ,, ,, ९
वातरोगे बिन्दुसाराद्यं ,, ३१ १३ | भगन्दरे मागध्याद्यं ,, ,, २०
कासे दशमूलाद्यं ,, ३२ ३ | ,, चित्रकाद्यं ,, ४७ २
तैलाधिकारो द्वितीयः। | गण्डमालायामजमोदाद्यं ,, ,, ८
कुष्ठे कटुकालाबुतैलम् ३२ १० | वातव्याधावश्वगन्धाद्यं ,, ,, १७
,, भद्राद्यं तैलम् ,, १७ | वातरोगे द्वितीयमश्व-
वातव्याधौ बलातैलम् ,, २३ | गन्धाद्यं ,, ४८ १४
,, बृहद्बलातैलम् ३३ ९ | कुङ्कुमाद्यं मुखकान्तिदं ,, ,, २५
,, तृतीयं बलातैलम् ,, २७ | वातरक्ते यष्टीमधुकाद्यं ,, ४९ ९
गृहकर्मणि चतुर्थं ,, ३४ ९ | कर्णरोगे लघुक्षारतैलम् ,, २७
वातव्याधौ प्रसारणीतैलम् ३५ २ | ,, बृहत्क्षारतैलम् ५० २
,, द्वितीयं ,, ,, २५ | नेत्ररोगे भृङ्गराजतैलम् ,, ११
,, तृतीयं ,, ३६ ११ | केशवृद्धौ द्वितीयं ,, ,, १४
३
विषयः पृ. पं. विषयः पृ. पं.
केशवृद्धौ तृतीयं भृङ्गराज तैलं ५० १७ कुष्ठे गुग्गुल्वाद्यं तैलम् ६१ ११
,, बृहद्भृङ्गराजाद्यं तैलम् ,, २० ,, विद्रावणं ,, ,, १६
केशरोगे असनाद्यं ,, ५१ ११ ,, महासुगन्धं ,, ,, २३
शिरोरोगे षड्विन्दुतैलम् ,, १४ ,, मरीचाद्यं ६२ १४
,, द्वितीयं ,, ,, २३ ,, भ्रामरिकं ,, ,, २६
दन्तरोगे बकुलाद्यं तैलम् ५२ ४ व्रणे महाकषायं ,, ६३ १२
,, नीलसहचराद्यं ,, ,, ९ वल्मीके मनःशिलाद्यं,, ,, २१
मुखरोगे इरिमेदाद्यं ,, ,, १४ गण्डमालायां फणिज्जकाद्यं ,, ,, २५
दन्तरोगे द्वितीयमिरिमेदाद्यं ,, काकादनीतैलम् ६४ ९
तैलम् ५३ २ रक्तपित्ते मूर्वाद्यं तैलम् ,, १६
,, खदिराद्यं ,, ,, १३ कुष्ठे विषादनं ,, ,, २२
ज्वरे बृहल्लाक्षादितैलम् ,, २६ ,, जीवन्त्याद्यं ६५ २
,, लघुलाक्षादितैलम् ५४ १५ पामायां जीरकाद्यं तैलम् ,, ७
सन्निपातज्वरे जात्यादि- कृमिरोगे विडङ्गाद्यं ,, ,, १०
तैलम् ५५ २ वातरोगे गुडूचीतैलम् ,, १५
ज्वरे षट्चरणं तैलम् ,, १३ ,, द्वितीयं ,, ,, २७
शोषे शिरीषाद्यं ,, ,, १६ ,, सहचरं ,, ६६ १४
,, सुकुमारतैलम् ५७ २ ,, नीलसहचरतैलम् ,, २३
अर्शसि लघुकासीसाद्यं ,, दशमूलाद्यं तैलम् ६७ ८
तैलम् ५८ २ भग्ने गन्धतैलम् ६८ ८
,, पृथुकासीसाद्यं ,, ,, ५ चूर्णाधिकारस्तृतीयः।
,, चित्रकाद्यं ,, ,, १२ गुल्मे हिङ्ग्वाद्यं चूर्णम् ६९ ७
कुष्ठे शिंशपासारतैलम् ,, २० शूले द्वितीयं ,, ,, ,, २०
,, वज्रकं तैलम् ,, २७ गुल्मे शार्दूलं ७० ८
,, महावज्रकं ,, ५९ ६ ,, नाराचकं ,, ,, १३
,, श्वेतकरवीराद्यं ,, ,, १३ ,, पूतिकाद्यं ,, ,, १६
,, सिन्दूराद्यं ,, ,, १८ ,, हिङ्ग्वाद्यं ,, ,, २१
,, कुष्ठकालानलं ,, ,, २३ श्वासे विजयं ,, ,, २४
,, कनकक्षीर्याद्यं ,, ६० ९ वातरोगे अजमोदाद्यं,, ७१ १२
पामायामार्द्रकाद्यं ,, ,, २२ ,, आभाद्यं ,, ,, २५
दद्रुरोगे दाव्याद्यं सूर्यपाक- अतिसारे कपित्थाष्टकं,, ७२ १०
तैलम् ,, २७ ग्रहण्यां द्वितीयं ,, ,, ,, १७
४
विषयः पृ. पं. विषयः पृ. पं.
ग्रहण्यां दाडिमाष्टकम्,, ७२ २६ अग्निमान्द्ये वैश्वानरं चूर्णम् ८३ ८
अतिसारे द्वितीयं ,, ७३ ४ गुल्मे द्वितीयं ,, ,, ,, ११
गलरोगे एलाद्यं चूर्णम् ,, १३ ,, तृतीयं ,, ,, ,, १८
अरोचके वृद्धैलाद्यं ,, ,, १८ अग्निदीप्त्यर्थे ज्वाला-
,, कर्पूराद्यं ७४ २ मुखं ,, ,, २५
,, त्वगेलाद्यं ,, ८ उदावर्ते नाराचकं ,, ८४ ४
गुल्मे त्रिलवणाद्यं ,, ,, १३ मेधावृद्ध्यर्थे सारस्वतं ,, ,, ११
अरोचके सूक्ष्मैलाद्यं ,, ७५ २ ,, बृहत्सारस्वतं ,, ,, २०
,, लवङ्गाद्यं ,, ,, १० अर्शोरोगे यवानिकाद्यं ,, ८५ ४
,, द्वितीयं ,, ,, २३ कासश्वासे बिभीतकाद्यं ,, ,, १२
,, तृतीयं ,, ७६ ३ हिक्काश्वासे रेणुकाद्यं ,, ,, १७
रक्तपित्ते चन्दनाद्यं ,, ,, १० ,, सुरसाद्यं ,, ,, २४
प्रतिश्याये व्योषादि चूर्णम् ,, २४ तमकश्वासे शठ्याद्यं ,, ८६ २
शोषे षाडवं ,, ७७ ४ दन्तरोगे तिक्तकं ,, ,, ७
,, महाषाडवं ,, ,, १२ ,, पीतकं ,, ,, १४
अरोचके दाडिमाद्यं ,, ,, २१ गलरोगे कालकं ,, ,, २१
कासे लघुतालीसाद्यं ,, ,, २५ मुखरोगे द्वितीयं पीतकं,, ,, २६
गुल्मे शार्दूलं ,, ७८ ८ कासे जीवन्त्याद्यं ,, ८७ ४
उदरे नारायणं ,, ,, १३ अतिसारे भूनिम्बाद्यं ,, ,, १३
,, हपुषाद्यं ,, ७९ २ ग्रहण्यां पाठाद्यं ,, ,, १८
,, नाराचकं ,, ,, ११ ,, नागराद्यं ,, ,, २२
,, सुवर्णसमंकं ,, ,, १९ राजयक्ष्मणि सितोपलाद्यं ,, ,, २७
कुष्ठे पटोलाद्यं ,, ८० ६ योनिदोषे पुष्यानुगं ,, ८८ ६
,, द्राक्षाद्यं ,, ,, १३ पाण्डुरोगे योगराजं ,, ,, १९
आमवाते अलम्बुषाद्यं ,, ,, २० कुष्ठे त्रिफलाद्यं ,, ८९ ९
,, द्वितीयमल- मन्दाग्नौ व्योषाद्यं ,, ,, १४
म्बुषाद्यं ,, ८१ २ पाण्डुरोगे खण्डसमकं,, ,, १९
श्वासकासे विडङ्गाद्यं ,, ,, ८ शोफे पाठाद्यं ,, ९० ४
मन्दाग्नौ वडवानलं ,, ,, १७ कुष्ठे बाकुचिकाद्यं ,, ,, ८
,, द्वितीयं ,, ,, २० ,, पृथुनिम्बपञ्चकं,, ,, १३
ग्रहण्यामग्निसुखं ,, ,, २३ ,, बृहत्पञ्चनिम्बकं,, ,, १८
गुल्मे द्वितीयमग्निसुखं ,, ८२ २ मन्दाग्नौ लवणभास्करं ,, ९१ १६
,, बृहदग्निसुखं ,, ,, ५
५
विषय: पृ. पं. | विषय: पृ. पं.
शूले सामुद्राद्यं चूर्णम् ९२ ६ | मन्दाग्नौ शतपुष्पाद्यं ,, १०० १७
,, तुम्बर्वाद्यं ,, ,, १४ | गुल्मे नारायणं ,, ,, २०
,, हिङ्ग्वष्टकं ,, ,, १९ | ,, त्र्यूषणाद्यं ,, ,, २८
अरोचके द्वितीयं ,, ,, २४ | मन्दाग्नौ सैन्धवाद्यं ,, १०१ ५
मन्दाग्नौ रामठाद्यं ,, ९३ २ | आमातीसारे पिप्प-
सर्वाङ्गशूले चित्रकाद्यं ,, ,, ७ | ल्याद्यं ,, ,, ११
मन्दाग्नौ सैन्धवाद्यं ,, ,, २० | पीनसे चव्याद्यं ,, ,, १६
वातव्याधौ सामुद्राद्यं ,, ,, २५ | कासेऽजमोदादिभस्मचूर्णम् ,, २१
रसायनार्थं नारसिंहं ,, ९४ ५ | दाहरोगे द्राक्षादिचूर्णम् १०२ ४
अतिसारे गङ्गाधरं ,, ९५ २ | पाण्डुरोगे नवाsystemयसं चूर्णम् ,, ११
गुल्मे कट्टत्रिकाद्यं ,, ,, ९ | राजयक्ष्मणि द्वितीयं
स्थौल्ये व्योषाद्यं ,, ,, १७ | बृहन्नवायसं ,, ,, १५
वातकासे विडङ्गाद्यं ,, ,, २६ | गुटिकाधिकारश्चतुर्थः ।
गुल्मे वचाद्यं चूर्णम् ९६ ३ | अग्निमान्द्येऽभयाद्या
पाण्डुरोगे किरातात्तिक्ताद्यं | गुटिका १०२ २३
चूर्णम् ,, ११ | अर्शसि काङ्कायनवटकः १०३ १०
कुष्ठादौ खण्डसमं ,, ,, १८ | गुल्मे काङ्कायनगुटिका ,, २०
कुष्ठे बाकुच्याद्यं ,, ९७ ३ | ,, निकुम्भाद्या गुटिका १०४ ९
उदरे भस्मार्कचूर्णम् ,, २० | विड्बन्धेऽभयावटकाः ,, १६
अर्शसि पूतीकरञ्जाद्यं ,, ९८ १६ | पाण्डुरोगे वज्रकगुटिका १०५ २
गुल्मे यवक्षाराद्यं ,, ,, २१ | शूले शम्बूकाद्या गुटिका ,, २१
ज्वरातिसारे व्योषाद्यं ,, ,, २६ | अग्निमान्द्ये कल्याणवटकाः१०६ ४
शोफे कृष्णाद्यं ,, ९९ ८ | क्षतक्षीणे एलाद्या गुटिका ,, १७
श्वासहृद्रोगयोर्हिङ्गुपञ्चकं ,, ,, १३ | ,, सर्पिर्गुटिका ,, २६
श्लीषे तिलाद्यं ,, ,, १६ | पाण्डुरोगे मण्डूरवटकाः १०७ १२
वर्ध्मरोगे बिल्वमूलाद्यं ,, ,, १९ | ,, द्वितीयो ,, ,, २१
सर्वमेहेष्विन्द्रयवाद्यं ,, ,, २४ | शोषे क्षारगुटिका १०८ ४
शूले शर्कराद्यं ,, १०० २ | कुष्ठे विडङ्गसाराद्या गुटिका ,, १३
आनाहे द्विरुत्तरं | ,, मणिभद्रवटकः ,, २०
हिङ्ग्वाद्यं ,, ,, ५ | अर्शसि सूरणवटकाः ,, २५
पानीयच्छायायां | ,, लघुसूरणवटिकाः १०९ १६
मुक्ताद्यं ,, ,, ८ | ,, मरीचाद्या गुटिकाः ,, १९
६
विषय: पृ. पं. | विषय: पृ. पं.
अर्शसि कलिङ्गाद्या गुटिका: १०९ २४ | प्लीहोदरे रोहितकवटका: ११७ २३
गुल्मे गुडवटका: ,, २७ | गुडपाकविधि: ११८ २
अतिसारेऽभयाद्या वटका: ११० ३ | धातुक्षये महाकल्याणको
सर्वातिसारेऽङ्कोलवटिका ,, ६ | गुड: ,, ९
,, बृहदङ्कोलवटिका ,, १३ | ग्रहण्यां कल्याणको ,, ११९ ३
अतिसारे कट्फलाद्या गुटिका ,, १९ | ,, यवान्याद्या गुटिका ,, ९
ग्रहण्यां चित्रकाद्या ,, १११ ८ | प्रमेहे चन्द्रप्रभा गुटिका ,, १६
,, क्षारगुटिका ,, १३ | पित्ते कल्याणका ,, १२० ४
,, तालीसाद्या गुटिका ,, २४ | अर्शसि प्राणदा ,, ,, १३
क्षयरोगे लघुतालीसादि- | अग्निमान्द्ये वार्ताकगुटिका १२१ ६
वटिका ११२ १२ | पाण्डुरोगेऽभयाद्यो मोदक: ,, १२
लवङ्गाद्या गुटिका ,, १८ | गुल्मेऽभयाद्या वटका: ,, २४
कुष्ठे तुवरास्थिवटका: ११३ ३ | विषूचिकायां जीरकाद्या
,, खदिरादिवटिका ,, १५ | गुटिका १२२ ९
,, विषगुटिका: ११४ २ | बृहच्छिवगुटिका ,, १४
,, लाङ्गलीगुटिका: ,, ९ | पाण्डुरोगे लघुशिव-
कण्ठ्यां त्रिजातगुटिका: ,, १८ | गुटिका १२४ ८
मुखरोगे खदिरगुटिका ,, २३ | कुष्ठे वज्रकगुटिका: ,, २१
,, द्वितीया ,, ११५ १३ | विषे सर्षपाद्या गुटिका १२५ २१
,, तृतीया ,, ,, १९ | भूतदोषे सिद्धार्थ-
गलरोगे मरीचाद्या गुटिका ,, २४ | क्वाथ ,, १२६ १०
,, पिप्पल्यादि- | शोषेऽश्वत्थवटका: ,, १७
क्षारगुटिका ११६ २ | पाण्डुरोगे पुनर्नवामण्डूर: १२७ २०
कफरोगे वत्सनाभाद्या ,, ७ | वातव्याधौ रसोनपिण्ड: १२८ ३
श्वासे भार्ङ्गया ,, ,, १७ | वातव्याधौ बृहल्लशुनपिण्ड: ,, १४
ज्वरे त्रिवृताद्यो मोदक: ,, २० | ,, व्योषाद्या गुटिका १२९ २
तृषायां कम्पिल्लाद्यो ,, ,, २३ | कुष्ठे स्वायम्भुवो गुग्गुलु: ,, ११
पार्श्वशूले त्रिफलाद्यो ,, ,, २७ | ,, सप्तविंशतिका
ज्वरे सगुलाद्यो ,, ११७ ४ | गुग्गुलुवटिका ,, २१
भ्रमे कृष्णाद्या गुटिका ,, १३ | रास्नाद्यो गुग्गुलु: १३० १३
ज्वरातिसारे कट्फलाद्या | आमवाते द्वात्रिंशत्का
वटका: ,, १६ | गुग्गुलुवटिका ,, १६
७
विषयः पृ. पं. विषयः पृ. पं.
वातव्याधौ बिल्वाद्यो रक्तपित्ते खण्डकूष्माण्डा-
गुग्गुलुः १३१ ४ वलेहः १४१ २
अर्शसि योगराजो गुग्गुलुः ,, १३ अर्शसि खण्डसूरणावलेहः ,, ७
नाडीव्रणे त्रिफलाद्यो ,, १३२ ४ क्षये गुडकूष्माण्डकावलेहः ,, १०
प्रमेहे गोक्षुरगुग्गुलु- शोषे एलाद्यवलेहः ,, २४
वटिका ,, ६ अर्शसि भल्लातकावलेहः १४२ ८
वातगुल्मवातरक्तयोः ग्रहण्यां कल्याणको
कैशोरको गुग्गुलुः ,, १३ गुडावलेहः ,, २१
कार्ये पञ्चजीरकावलेहः १४३ ७
वातरोगे त्रिफलाद्यो ,, १३३ ९ योनिरोगे ,, ,, १६
गृध्रस्यां कंसाह्वयो गुग्गुलुः ,, १८ अर्शसि बाहुशालो
गण्डमालायां त्रिफलाद्या गुडावलेहः १४४ २
गुग्गुलुवटिका १३४ ४ श्वासकासे बिभीतकावलेहः ,, २१
वातरक्ते बृहत्त्वायम्भुव- कासेऽगस्त्यहरीतक्यवलेहः ,, २४
गुग्गुलुः ,, १९ ,, द्वितीयो ,, १४५ ७
कासे सप्तचत्वारिंशत्तिका वासिष्ठहरीतक्यवलेहः १४६ २
गुग्गुलुगुटिका १३५ ८ वासाहरीतक्यवलेहः ,, ११
वातरक्ते कन्थडिका गुल्मे दन्तीहरीत-
गुग्गुलुगुटिका ,, २४ क्यवलेहः १४७ ९
गण्डमालायामष्टचत्वारिंश- कासे व्याघ्रीहरीतक्यवलेहः ,, २४
त्संज्ञा गुग्गुलुगुटिका १३६ १४ सर्वकासे द्वितीयो ,, १४८ ७
भगन्दरे अमृताद्या गुटिका १३७ ५ प्लीहोदरे रोहीतकावलेहः ,, १६
शोफे गुडार्द्रकगुटिकाः ,, ८ शोफे पुनर्नवाहरीत-
गुल्मे आरोग्यलवणम् ,, १३ क्यवलेहः ,, २१
गण्डमालायां काञ्चनार- ,, कंसहरीतक्यवलेहः १४९ ५
गुग्गुलुः १३८ ९ ,, हरीतक्यवलेहः ,, १२
,, काञ्चनगुटिकाः ,, २१ अर्शःपीनसयोश्चित्रक-
लेहाधिकारः पञ्चमः । हरीतक्यवलेहः ,, १९
अर्शसि पथ्यावलेहः १३९ ३ मन्दाग्नौ द्वितीयश्चित्रक-
,, चित्रकावलेहः ,, १८ हरीतक्यवलेहः १५० ६
,, द्वितीयः ,, १४० ४ हलीमके आमलकावलेहः ,, २२
रक्तपित्ते कूष्माण्डावलेहः ,, १३ कामलायां विडङ्गाद्य-वलेहः १५१ ४
८
विषयः पृ. पं. | विषयः पृ. पं.
श्वासे हरीतक्यवलेहः १५१ ११ | नवविधा आसवयोनिः १६६ १८
अर्शसि कुटजावलेहः ,, २५ | षड्विधान्यासवाः ,, २४
,, द्वितीयः ,, १५२ १७ | षड्विंशतिः फलासवाः ,, २७
,, कुटजाष्टकोऽवलेहः ,, २७ | एकादश मूलासवाः १६७ ६
ग्रहण्यां मधुपाकविधिः १५३ १० | विंशतिः सारासवाः ,, १०
कासे कण्टकार्यवलेहः ,, २० | दश पुष्पासवाः ,, १५
शोषे निदिग्धिकायोऽ- | चत्वारः काण्डासवाः ,, १९
वलेहः १५४ ७ | द्वौ पत्रासवौ ,, २१
उदावर्ते पटोलमूलावलेहः ,, १९ | चत्वारस्त्वगासवाः ,, २३
मुखरोगे दार्ब्यवलेहः १५५ ७ | शर्करासवः ,, २५
आमवाते नागराद्योऽवलेहः ,, १६ | आसवानां विकल्पसंस्कार-
कासे कसेर्वाद्योऽवलेहः ,, २१ | गुणाः ,, २७
अर्शसि भल्लातकावलेहः १५६ ३ | वातव्याधौ विडङ्गासवः १६८ १०
पीनसे चित्रकावलेहः ,, २० | प्रमेहे रोध्रासवः ,, २२
रक्तपित्ते खण्डखाद्योऽ- | प्रमेहे देवदार्वासवः १६९ ४
वलेहः १५७ ५ | कुष्ठे कनकारिष्टः ,, १८
,, द्वितीयो वासावलेहः १५८ ८ | अर्शसि द्वितीयः ,, १७० २
श्वासकासयोर्भार्गी- | ग्रहण्यां दुरालभारिष्टः ,, २५
गुडावलेहः ,, १६ | अर्शसि दन्त्यरिष्टः १७१ ७
,, कुलत्थगुडावलेहः १५९ २ | ,, अभयारिष्टः ,, १६
,, पिप्पलीगुडावलेहः ,, ११ | ग्रहण्यां द्वितीयो ,, १७२ २
अतीसारे कुटजावलेहः ,, १६ | प्रमेहे तृतीयो ,, ,, ११
,, द्वितीयः ,, १६० ८ | पाण्डुरोगे मण्डूरारिष्टः ,, २१
अर्शस्सु ,, ,, १६ | क्षयरोगे पिप्पल्यारिष्टः १७३ ५
जरायां च्यवनप्राशावलेहः ,, २५ | शोफेऽष्टशतारिष्टः ,, १५
,, ब्राह्माद्यावनावलेहः १६१ २५ | अर्शसि तक्रारिष्टः ,, २०
क्षतक्षीणेऽमृतप्राशावलेहः १६३ ८ | अरोचके लघुचुक्रसन्धा-
लघुच्यवनप्राशोऽवलेहः ,, २४ | नम् १७४ ३
शोषेऽमृतप्राशोऽवलेहः १६४ १० | मन्दाग्नौ बृहच्चुक्रसन्धानम् ,, ८
आसवाधिकारः षष्ठः । | ,, लवङ्गासवः ,, १९
उदरे कुमार्थासवः १६५ ३ | प्लीहे रोहीतकासवः १७५ ३
गुल्मे द्वितीयः १६६ ७ | अर्शस्सु गण्डिकाद्रोणः ,, ९
९
| विषयः | पृ. | पं. | विषयः | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| कुष्ठे खदिरासवः | १७५ | १८ | ज्वरे धान्यकाद्यरिष्टः | १९१ | १६ |
| ,, द्वितीयः खदिरारिष्टः | १७६ | ६ | धातुक्षये लवङ्गासवः | ,, | २५ |
| क्षयरोगे बब्बूल्यासवः | ,, | १५ | विद्रधौ वरुणासवः | १९२ | १६ |
| ,, पुष्करमूलासवः | ,, | २३ | प्लीहरोगे रोहीतकासवः | १९३ | १८ |
| ,, माचिकासवः | १७७ | १० | शोषादौ गण्डीरासवः | १९४ | ५ |
| शोफे पुनर्नवासवः | ,, | २० | प्लीहरोगे रोहीतकासवः | १९५ | ४ |
| ,, त्रिफलारिष्टः | १७८ | ४ | क्षये योगराजासवः | ,, | ११ |
| सर्वशोफे वासकासवः | ,, | ८ | अशोरोगे पील्वासवः | १९६ | ८ |
| अर्शस्सु शर्करासवः | ,, | १६ | प्रमेहे मध्वासवः | ,, | १५ |
| ग्रहण्यां द्राक्षासवः | १७९ | २ | पाण्डुरोगे लोहासवः | ,, | २१ |
| अर्शसि द्वितीयो ,, | ,, | १६ | प्रयोगखण्डस्य परिशिष्टम् । | ||
| ग्रहण्यां बीजकासवः | १८० | २ | परिशिष्टे घृताधिकारः प्रथमः । | ||
| अर्शसि पील्वासवः | ,, | १२ | रक्तपित्ते कटुकाद्यं घृतम् | १९७ | ११ |
| रक्तपित्ते उशीरासवः | ,, | २१ | गुल्मे दाधिकं ,, | ,, | १८ |
| श्वासकासयोस्त्रायमाणा- | ,, लशुनघृतम् | १९८ | २२ | ||
| सवः | १८१ | ५ | ,, महाषट्पलं घृतम् | १९९ | २ |
| गुल्मे चविकासवः | ,, | १६ | उन्मादे कल्याणकं ,, | ,, | १५ |
| ग्रहण्यां मूलासवः | १८२ | ४ | उन्मादे द्वितीयं कल्याणकं | ||
| क्षयरोगे बृहन्मूलासवः | ,, | १३ | घृतम् | २०० | ५ |
| धातुक्षये भृङ्गराजासवः | १८३ | ६ | ,, तृतीयं ,, ,, | ,, | १३ |
| भगन्दरे गुग्गुल्वासवः | ,, | १५ | ,, महाकल्याणकं ,, | ,, | २५ |
| अर्शस्सु ताम्बूलासवः | १८४ | ८ | विसर्पे महागौरं ,, | २०१ | ४ |
| अपस्मारे पञ्चमूत्रासवः | ,, | २६ | मेधावृद्ध्यर्थे सप्ताङ्गं ,, | ,, | २० |
| धातुक्षये हरीतक्यासवः | १८५ | ८ | ,, अष्टाङ्गं ,, | ,, | २५ |
| दद्रौ आवर्तक्याद्यासवः | १८६ | १३ | बालग्रहे फलघृतम् | २०२ | ८ |
| क्षये दशमूलासवः | ,, | १८ | चातुर्थकज्वरे महापैशाचकं | ||
| राजयक्ष्मणि खर्जूरासवः | १८७ | २६ | घृतम् | ,, | १५ |
| ग्रहण्यां मस्त्यासवः | १८८ | १८ | शोषे जीवन्त्याद्यं ,, | ,, | २४ |
| ज्वरे कुब्जकासवः | १८९ | ५ | कुष्ठे महातिक्तकं ,, | २०३ | ४ |
| धातुक्षये नालिकेरासवः | ,, | १५ | वातव्याधौ दशमू- | ||
| ,, कूष्माण्डासवः | ,, | २७ | लाद्यं ,, | ,, | २१ |
| ,, रसायनारिष्टः | १९० | २६ | कासे बृहत्कण्टकारीघृतम् | २०४ | २ |
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| विषय: | पृ. | पं. | विषय: | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| व्रणे जात्याद्यं घृतम् | २०४ | १२ | ऊरुस्तम्भे द्विपञ्च- | ||
| प्रवाहिकायां | मूल्याद्यं तैलम् | २१४ | १८ | ||
| त्र्यूषणाद्यं | ,, | १७ | अर्शसि कासीसाद्यं ,, | २१५ | ९ |
| रक्तपित्ते कशेरुकं | ,, | २२ | कृमिरोगे महावीर्यं | ,, | १२ |
| नेत्ररोगे द्राक्षाद्यं | २०५ | २ | अन्त्रवृद्धौ गन्धर्वतैलम् | २१६ | १० |
| रक्तपित्ते दाडिमाद्यं | ,, | ८ | कर्णरोगे लाङ्गल्याद्य तैलं | ,, | १६ |
| योनिरोगे बृहत्पञ्च- | शिरोरोगे महानीलं | ,, | २४ | ||
| मूलाद्य | ,, | १६ | कुष्ठे गुञ्जाद्यं | २१७ | १२ |
| अर्शसि पिप्पल्याद्यं | ,, | २३ | मञ्जिष्ठाद्यं | ,, | २१ |
| शोषे जीवन्त्याद्यं | २०६ | ९ | कुष्ठे सिद्धार्थकतैलम् ,, | २१८ | ५ |
| शिरोरोगे मायूरं | ,, | १६ | परिशिष्टे चूर्णाधिकारस्तृतीयः। | ||
| ,, महामायूरं ,, | ,, | २३ | मन्दाग्नौ शुण्ठ्याद्यं चूर्णम् | २१८ | १५ |
| अक्षीरोगे अवाक्पु- | हृद्रोगे तिक्तकं | ,, | १८ | ||
| ष्याद्यं | २०७ | १४ | कुष्ठे लाक्षाद्यं | ,, | २४ |
| अपतन्त्रके शुक- | ग्रहण्यां पञ्चामृतरसः | २१९ | ४ | ||
| नासाद्यं | २०८ | ६ | मन्दाग्नौ पञ्चसमं | ,, | १३ |
| उन्मादे चेतसं | ,, | १३ | छर्द्यां बदराद्यं | ,, | १८ |
| क्षीणक्षते समदुग्धकं | ,, | १८ | उदरे नवक्षारकं | ,, | २५ |
| वातगुल्मे हिङ्ग्वाद्यं | २०९ | ४ | मन्दाग्नावजमोदाद्यं | २२० | ४ |
| परिशिष्टे तैलाधिकारो द्वितीयः। | दन्तरोगे जातीपत्राद्यं | ,, | ७ | ||
| कुष्ठे सहचरतैलम् | २०९ | १० | कासे जातीफलाद्यं | ,, | १२ |
| तरक्षाद्यं तैलम् | २१० | ४ | ग्रहण्यां दाडिमाद्यं | ,, | २२ |
| व्याघ्रतैलम् | ,, | १२ | मन्दाग्नावामलक्यादि ,, | २२१ | ७ |
| वातारितैलम् | २११ | १८ | स्त्रीरोगे मेथिकाद्यं | ,, | १० |
| दारुणके सास्थ्याद्यं | २१२ | ३ | कामवृद्धौ राजयोगः | ,, | १९ |
| वातरोगे दशाङ्गं | ,, | ७ | क्षये आभाद्यं | २२२ | ९ |
| ,, कर्पूराद्यं | ,, | २२ | पिप्पल्याद्यं चूर्णम् ,, | ,, | १९ |
| ज्वरे त्र्यूषादिकं | २१३ | ५ | मन्दाग्नौ रुचकाद्यं | २२३ | २ |
| कुष्ठे अन्वासनं | ,, | १५ | ,, सिंहणचूर्णम् | ,, | ७ |
| ,, महानीलं | ,, | २३ | अर्शसि सूरणाद्यंचूर्णम् | ,, | १२ |
| पलिते नील्याद्यं | २१४ | ९ | वातरोगे हरीतकीयोगः | ,, | १७ |
११
विषयः पृ. पं. | विषयः पृ. पं.
विद्रधौ भूनिम्बाद्यं चूर्णम् २२३ २० | रसायनार्थे विजया
ज्वरे किराततिक्ताद्यं ,, २२४ २ | गुटिका २३२ १६
कासे दुरालभाद्यं ,, ,, ९ | वातरोगे योगोत्तमा
ग्रहण्यां पिप्पली- | गुटिका २३३ १७
मूलाद्यं ,, ,, १२ | प्रमेहे कर्पूरादिगुटिका २३४ १३
ग्रहण्यां कुठेरकार्थं ,, ,, १७ | गुल्मे गुडवटकाः ,, २०
शोफे अयोरजश्चूर्णम् २२५ २ | पाण्डुरोगे क्षारवटकाः ,, २३
पाण्डुरोगे नवायसं चूर्णम् ,, २६ | कुष्ठे पथ्या वटकाः २३५ १६
प्रवाहिकायां कूट- | ज्वरे फलत्रिकाद्यो
जाद्यं ,, २२६ ६ | मोदकः ,, २५
गुल्मे समशर्करं ,, ,, ११ | रसायने त्रिफलाद्या
शोषे तिलाद्यं ,, ,, १६ | वटकाः २३६ २
मन्दाग्नौ आमलकादि ,, ,, १९ | अरचौ लाजाद्यो मोदकः ,, १६
,, सौवर्चलाद्यं ,, २४ | राजयक्ष्मणि त्रिफलाद्या
,, अग्निचूर्णम् २२७ २ | गुटिका ,, २०
,, सिंहनचूर्णम् ,, ६ | अर्शसि चित्रकगुटिका २३७ २
परिशिष्टे गुटिकाधिकार- | प्रमेहे वामदेवेन कथिता
श्चतुर्थः । | गुटिका ,, २
क्षतक्षीणे सर्पिर्गुटिका २२७ १४ | जरायां गुग्गुलुगुटिका ,, १४
,, क्षीरादिलेह- | शोफे लघुत्रिफलागुग्गुलु-
गुटिका ,, २३ | गुटिका ,, २१
सर्वरोगे प्रभावतीवटिका २२८ १५ | वातव्याधौ पृथुत्रिफलाद्या
वातरोगे अभ्रमुखवटी ,, २१ | गुग्गुलुगुटिका ,, २४
श्वासादौ सूर्यचन्द्रप्रभा | गुल्मे त्रिवृताद्या
गुटिका २२९ ४ | गुटिका २३८ ११
अतिसारे विशल्या | भ्रमरोगे कृष्णाद्या ,, ,, २२
गुटिका २३० ९ | परिशिष्टे पञ्चमोऽवले-
वातरोगे त्रोटहरी ,, ,, २० | हाधिकारः
कासे चन्द्रप्रिया ,, २३१ ४ | शोषे पिप्पल्याद्योऽव-
मुखरोगे खादिरगुटी ,, ८ | लेहः २३९ ३
,, द्वितीया ,, २३२ २ | ,, द्वितीयः ,, ,, १६
क्षतरोगे त्वगेलाद्या गुटिका १३
२
१२
विषयः पृ. पं. | विषयः पृ. पं.
क्षये रसाङ्गहरीतक्य- | धातुक्षये मधुपकामलकी २४२ १९
वलेहः २४० २ | स्वरभङ्गे कुलिञ्जनाद्योऽ-
जीर्णज्वरे खण्डा- | वलेहः २४३ ४
र्द्रकावलेहः ,, ८ | कासे भागर्याद्यवलेहः ,, १५
अतिसारेऽङ्कोलमूला- | हृद्रोगे चन्दनावलेहः ,, २३
वलेहः ,, १७ | शुक्रक्षयेऽश्वगन्धाद्य-
अर्शसि भल्लातकावलेहः ,, २६ | वलेहः २४४ ७
अतिसारे कुटजाष्टका- |
वलेहः २४२ २ |