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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

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पृष्ठ 14

विषयानुक्रमणिका १३
अध्याय १७ ४५१-४७५
चारों युगों के धर्म, वर्णाश्रम धर्म, उनके लक्षण, वर्ण-बाह्यों के लक्षण, धर्मों के धर्म
लक्षण, ब्रह्मचर्य गृहस्थ के धर्म।
अध्याय १८ ४७६-४९४
वानप्रस्थाश्रम धर्म, संन्यासाश्रम धर्म, परमहंस का. धर्म, शक्ति व भक्ति का वर्णन।
अध्याय १९ ४९५-५२०
युधिष्ठिर को भीष्म द्वारा मोक्ष धर्म कथन, ज्ञान-विज्ञान लक्षण, शक्ति रहस्य, यम
नियम, निर्गुण विवेचन, शम दमादि के लक्षण।
अध्याय २० ५२१-५४१
वेद ही गुण-दोष बनाते, फिर कैसे न देखें? किसकी सुनें तुम्हारी या वेद की?
उद्धव का प्रश्न एवं समाधान गुण-दोष न देखना उत्तम साधना, मनोजय, कर्म,
सांख्य एवं भक्ति योग।
अध्याय २१ ५४२-५६५
स्वधर्माचरण से मोक्ष-प्राप्ति, देशकाल द्रव्य की शुद्धता, धर्म, अधर्म, फलश्रुति का
स्वरूप, कर्मकाण्डियों का मनोराज्य, श्रीकृष्ण ही सही अर्थ में वेदज्ञ।
अध्याय २२ ५६६-५९९
तत्व संख्या निरूपण, प्रकृति एवं पुरुष, मंत्रों का एकत्व, जन्म, मरण, देह, अवस्था,
आत्मा पर आरोप।
अध्याय २३ ६००-६४४
भिक्षु गीतारंभ, अधर्म का धन नाशवान, धन के पाँच हिस्सेदार, भिक्षु कथा, छल
पश्चात्ताप तथा स्वयं की कथा का वर्णन, सुख-दुःख मीमांसा, भिक्षु गीत माहात्म्य।
अध्याय २४ ६४५-६७१
कपिल एवं देवहुति संवाद, ज्ञान से द्वंद्वनाश, नारायण का लीला विग्रह, सृष्टिक्रम;
त्रिलोक रचना, प्रलय लक्षण, कर्म की ऊँच-नीच गति, स्वर्ग, ध्रुव, वैकुण्ठ लोकों
का वर्णन, सगुण भक्तों को सायुज्यता, अनन्य भक्तों का प्रेमरहस्य, सांख्य शास्त्र।
अध्याय २५ ६७२-६९२
त्रिगुण विजय, निर्गुण उपासना, त्रिगुणों के लक्षण, त्रिगुण तथा निर्गुण आहार, त्रिगुणों
से सुख, निर्गुण सुख, विविध वृत्ति, विविध अहंकार एवं ममत्व के लक्षण, गुण एवं
निर्गुण ज्ञान वर्णन।
अध्याय २६ ६९३-७१४
विषयासक्ति से अनर्थप्राप्ति, भागवत धर्माचरण यही नरदेह का कर्त्तव्य, विषयासक्ति
निषेध, पुरूर व्याख्यान, ऐलगीत, संतसंग महिमा।