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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

१२ श्रीमद् एकनाथी भागवत
अध्याय ८ १९३-२०१
अजगर, पतंग, समुद्र, मधुमक्खी, मछली, पिंगला वेश्या आदि गुरुओं से अवधूत ने
बोध प्राप्त किया।
अध्याय ९ २१०-२३२
परिग्रह से बाधकता, त्याग से अनन्त सुख की प्राप्ति, टिटवी, बालक, साँप, मकड़ी
आदि शेष गुरुओं से बोध, दत्तात्रेय परम्परा, सद्गुरु माहात्म्य, यदु की संगमुक्तता।
अध्याय १० २३३-२६५
निष्काम धर्माचरण, सद्गुरु की आवश्यकता, शिष्य लक्षण, स्वर्ग-सुख का वर्णन,
सकाम कर्म के दुष्परिणाम, वेदान्त-मीमांसक मत विवेचन।
अध्याय ११ २६६-३३२
बंधमोक्ष की व्याख्या, शुकवामदेव दृष्टांत, विद्या, अविद्या, जीव परमात्मैक्यता, मुक्तों
के लक्षण, पाण्डित्य, प्रतिष्ठा प्राप्ति के इच्छा की निरर्थकता, वैदिक तांत्रिक दीक्षा,
प्रतिमा पूजा का विधान, पूजा के ११ अधिष्ठान, निर्गुण से सगुण का वैशिष्ट्य नाम
महिमा, सत्संग यह भक्ति का सर्वोत्तम साधना।
अध्याय १२ ३३३-३५९
सत्संग महिमा, गोपिका यश वर्णन, भववृक्ष वर्णन, गुरु भक्ति से भववृक्षच्छेदन।
अध्याय १३ ३६०-३९४
त्रिगुण लक्षण, परमार्थ के लिये सत्यगुण, उसी से रजतम का नाश, सनकादिकों के
ब्रह्मदेव से प्रश्न, चित्त में विषय या विषय में चित्त, हंसगीता, सनकादिकों का सन्देह
निवारण।
अध्याय १४ ३९५-४२०
‘‘भक्ति से सायुज्य मुक्ति मिलती है तो वेदज्ञ भिन्न-भिन्न मतों का प्रतिपादन क्यों
करते हैं ?’’ उद्धव की शंका का समाधान, पुरुषार्थ सम्बन्धी मतभेद, तदनुरूप वेदार्थ,
उत्तम पुरुषार्थ भक्ति, स्त्री-संग त्याग, ध्यानयोग वर्णन।
अध्याय १५ ४२१-४३३
भक्ति मार्ग में सिद्धियों का विघ्न, अष्ट महासिद्धि तथा १० अन्य सिद्धियों की
प्राप्यता, सिद्धि साधनोपाय, सिद्धियों का वर्णन तथा उनके त्याग की आवश्यकता पर
बल।
अध्याय १६ ४३४-४५०
नाथ भागवत का पूर्वार्द्ध विश्लेषण, भगवद्विभूति वर्णन, अर्जुन के प्रश्न का सन्दर्भ,
समाधान एवं वासुदेवादि व्यूहमूर्ति, उनके भक्त, विभूतियों का अनंततत्व, भक्त
महिमा आदि।