सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

पृष्ठ 94, कुल 156 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 94

श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ [ ७०
उष्णिक् छन्दः, शाकम्भरी शक्ति, दुर्गा बीजम्, वायुस्तत्वम्,
यजुर्वेदः स्वरूपम्, श्री महालक्ष्मी प्रीत्यर्थं मध्यम चरित्र जपे
विनियोगः ।
इस चरित्र के ऋषि विष्णु हैं, जैसे ब्रह्मा जी सृष्टि के
रचयिता हैं, वैसे ही श्रीविष्णु भगवान् सृष्टि के पोषण कर्ता हैं।
ब्रह्मा जी वेद-शास्त्र के प्रवर्त्तक हैं। जब समाज में वेद-शास्त्र
पर घात होता है तब वह पालनीय शक्ति कैसे रक्षा करती है ?
इस बात को आप भली भाँति सुन चुके हैं। जब समाज में
उदण्ड, उच्छृंखल, स्वेच्छाचारी दुष्टों का साम्राज्य बढ़ने लगता
है, दैवी गुणों का ह्रास होने लगता है; तब किस प्रकार वह
पालन-पोषणीया शक्ति समाज की रक्षा करती हैं यह कथा अब
सुनाई जायेगी। इस चरित्र के देवता भगवान् की इच्छा शक्ति
महालक्ष्मी हैं लक्ष्मी शब्द के कई अर्थ होने हैं—श्री, विजय,
विभूति (ऐश्वर्य), दीप्ति, कान्ति, नीति, शोभा। जीवन में ये
सभी चीजें प्रत्येक के लिए आवश्यक है। ये कैसे मिले ? इस
युक्ति को इस चरित्र में समझाया गया है। इसमें उष्णिक् छन्द
है, शाकम्भरी शक्ति है। इसमें भक्तों को याद दिलाई गई
है कि जब समाज में घोर दैत्यों का साम्राज्य आ गया था, तो
पराम्बा ने किस प्रकार शाकम्भरी का वेश धारण कर उनका
संहार किया था। यह कथा आप देवी भागवत में पढ़ें। यहाँ
केवल उनकी करुणा के लिए संकेत है।
सम्पूर्ण दुर्ग (क्लेशों) को नष्ट करने वाली माँ दुर्गा
इसका बीज है, वायु तत्व है और यजुर्वेद इसका स्वरूप है इन
सबका स्मरण कर—नाम लेकर हम उनके प्रति कृतज्ञ होते हैं;
और उन्हें नमस्कार करते हैं। जिन्होंने हमें यह चरित्र प्रदान
किया है। इन भगवती के चरणों में प्रणत होकर महर्षि मेधा
जी कहते हैं :—