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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 156 में से

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पृष्ठ 60

श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ [ ३६
इस निश्चय से शोक और भय दोनों नहीं होंगे। दुःख, दर्द, शोक
और भय तभी होते हैं जब किसी वस्तु और व्यक्ति के साथ
ममत्व जुड़ता है, 'अपना' मानते हैं। वस्तु और व्यक्ति दोनों का
वियोग होना निश्चित ही है अतः दुःख होना भी निश्चित एवं
अवश्यम्भावी है। भूतकाल का शोक और भविष्य का भय होता
है। उदाहरण के लिए एक घटना प्रस्तुत है।
एक सज्जन ने अपना एक मकान बेच दिया। अगले दिन
उसमें आग लग गई। सूचना मिलने पर दुःख होना तो दूर,
प्रसन्न होकर बोले, अच्छा हुआ जो कल बेच दिया था। इतने में
उसके पुत्र ने आकर कहा-उस मकान में अभी मेरा सामान रखा
हुआ है। बस फिर क्या था ? महाशय तुरन्त व्याकुल हो आग
बुझाने के लिए दौड़ पड़े। उधर दूसरे बेटे ने आकर कहा-
पिता जी घबराइए नहीं, अपना सामान मैं सब ले आया हूं। यह
सुनकर भद्र पुरुष शान्त हो गये। मकान जलता रहा, देखते
रहने पर भी लेश-मात्र चिन्ता एवं दुःख न था।
इसका तात्पर्य यह है कि जीव की (अपनी) सृष्टि ही दुःख
देती है। अतः यहाँ नन्दा शक्ति का नाम लेकर यहाँ यह बताया
गया है कि भगवान् में समर्पित होकर शोक-मोह से रहित हो
सकते हो।
रक्त-दन्तिका बीज है। वैप्रचित्त दैत्यों को संहारिणी-इस
शक्ति का नाम है। इनका नाम लेकर स्मरण दिलाया है कि
मेरे भी आसुरी भावों को नष्ट करो। रक्त-दन्तिका पीठ सैदनगर
(जालौन उत्तर प्रदेश) में है।
अग्नि-तत्व है। अग्नि में जलाने और प्रकाशित करने के
दो गुण हैं। पापों को जलाना और दिव्य गुणों को प्रकाश में
लाना दोनों ही जीवन में अनिवार्य हैं।
(क) ऋग्वेद स्वरूप हैं। वेद किसो पुस्तक का नाम नहों
है। वेद शब्द का अर्थ ज्ञान है। हमें अपनो देह से हो यह ज्ञान