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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

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श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ [ २८
ऐं-यह ज्ञान प्रदात्री सरस्वती का बीज मन्त्र है । सरस्वती
रहस्योपनिषद् तथा योग शिखोपनिषद् ग्रन्थों में इस मंत्र के
विस्तार, प्रयोग एवं महत्व का अवलोकन किया जा सकता है ।
वाक्-सिद्धि के प्रयोग शास्त्रों में है । सर्वं वाक्यात्मका मात्रा वेद
शास्त्राणि कृत्स्नशः । पुराणानि च काव्यानि भाषाश्च विविधा
अपि । सप्त स्वराश्च गाथाश्च सर्वनाद समुद्भवः ।
एषा सरस्वती देवी सर्वभूत गुहाशया ।
य इमां वैखरीं शक्तिं योगी स्वात्मनि पश्यति ।
स वाक् सिद्धिमवाप्नोति सरस्वत्याः प्रसादतः ॥
इस बीज मंत्र का जापक विद्वान् हो जाता है । एक ही
पराशक्ति द्वारा शरीर में सभी क्रियायें सम्पन्न होती हैं । जैसे—
(१) क्रियावती—शरीर कम्पादि, नृत्यादि, जगाना, (२) कला-
वती—३६ छत्तीस तत्वों से व्यतिरेक एवं जीव शुद्धि प्रकार,
(३) वर्णात्मिका—मंत्रों द्वारा कुण्डलिनो जगाना, (४) वेधमयी-
षट् चक्र वेध द्वारा-इस प्रकार गुरु जनों से पूछ कर प्रक्रिया का
ज्ञान होता है । ऋग्वेद १/२२/१६४/४५ देखें—चत्वारि वाक्
परिमितानि पदानि तानि विदुर्ब्राह्मणा ये मनीषिणः । गुहा त्रीणि
निहितानेङ्गयन्ति । तुरीयं वाचो मनुष्या वदन्ति—परा, पश्यन्ति
मध्यमा ये तीनों वैखरी में निहित हैं ।
(१) ऐं—वाक् बीज है, वाणी का देवता अग्नि है, सूर्य
भी तेज रूप अग्नि ही है सूर्य से ही दृष्टि मिलती है; दृष्टि
सत्य की पीठ है, यही सत्य पर ब्रह्म है । वृहदारण्यकोपनिषद्
(में) सत् ब्रह्म का प्रतिपादक है । इसी वाग्भव कूट में काम
कला और शक्ति-कूट ह्रीँ युक्त है, यह लक्ष्मी का बीज मंत्र है,
यही मंत्र राज है । सृष्टि का उदय सोऽकामयत यही आदि-
विद्या तथा सृष्टि का उदय-आकाशाद् वायुः आदि हादि
विद्या है । दोनों ही इसी शक्ति के खेल हैं । इस प्रकार 'ऐं'
का उदय अग्नि है । (मणिपूर) आयतन वाक्शक्ति का विशुद्ध-