दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary
महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७ ] श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ
६) बाधा शान्ति हेतु-
सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॥ १२/१३
अथवा
सर्वा बाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि ।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥ ११/३६
७) दरिद्रता नाश हेतु-
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः,
स्वस्थैःस्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्र्य दुःख भय हारिणि का त्वदन्या,
सर्वोपकार करणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता ॥ ४/१७
८) मोक्ष प्राप्ति हेतु-
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्त वीर्या,
विश्वस्य बीजं परमासि माया ।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्,
त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्ति हेतुः ॥ ११-५ ॥
इसके अतिरिक्त लक्ष्मी-प्राप्ति के अभिलाषी को नित्य-
प्रति चतुर्थ अध्याय तथा ज्ञान-प्राप्त्यर्थ ग्यारहवें अध्याय का पाठ
करना चाहिए ।
कुछ सौंदर्य लहरी के भी सिद्ध प्रयोग दिये जा रहे हैं ।
कामना अनुसार यंत्र को स्वर्ण-धातु से बनाकर पूजन करें
और उनमें लिखी संख्यानुसार सौंदर्य-लहरी के उस श्लोक का
जप करें ।
१-मंत्र ६३ :
[यंत्र: ह्रीँ] प्रतिदिन तीस हजार के जप क्रम से तीस
दिन तक करने से वशीकरण होता है ।