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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

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पृष्ठ 149

१२५ ] श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ
क्षमा प्रार्थना
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥ १
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि ॥ २
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥ ३
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।
यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः ॥ ४
सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।
इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु ॥ ५
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ॥ ६
कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरी ॥ ७
गुह्याति गुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि ॥ ८
भगवती दुर्गा जी के बत्तीस नाम भी बहुत प्रसिद्ध हैं।
उनमें नामों का स्मरण कर लेने से भी सभी प्रकार का लाभ
होता है ।
एक समय देवताओं की पूजा से प्रसन्न हुई पराम्बा ने
स्वयं अपने आप कृपा कर देवताओं को यह बत्तीस नामों की
माला सभी आपत्तियों का नाश करने वाली बतलाई थी । इन
नामों द्वारा मधु (शहद) मिलाकर सफेद तिलों से लाख आहुति
करे तो सभी विपत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं । इसका पुरश्चरण
तीस हजार का है । गुरुजनों से पूछकर विधिवत् पुरश्चरण
करने से सब प्रकार का लाभ होता है ।