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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 156 में से

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अमरता प्रदान करने के लिए 'सप्तशती पारिजात सौरभ' का
चिन्तन-मनन एवं अध्ययन अनिवार्य है, जो महाराज श्री की
अनुपस्थिति में भी तात्त्विक बोध के साथ-साथ इस मातृशक्ति
के रहस्य एवं चमत्कार से परिचित करायेगा।
प्रचार-प्रसार से दूर रहने वाले सन्तों की सिद्ध-वाणियों
को संगृहीत कर सर्व जनहिताय ग्रन्थ के रूप में प्रकाशित
करना महान उपकार है क्योंकि सद्ग्रन्थों के प्रचार से मानव
संस्कृति का अभ्युदय होता है। इसे प्रकाशित कराने का श्रेय
पटना-सिटी (पाटली पुत्र) में स्थित श्रीराम-धाम मानस-मन्दिर
के कर्मठ संचालक स्वामी श्री सत्यानन्द जी सरस्वती जी को है;
जो स्तुत्य है।
माँ जगदम्बा विश्व के समस्त मानवों को सुख-शान्ति
का वरदान दें, यही हमारी कामना है :—
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणी,
त्रैलोक्य वासिनामीड्ये लोकानां वरदाभव।
विश्व की पीड़ा दूर करने वाली देवी! हम तुम्हारे
चरणों में नत मस्तक हैं। आप प्रसन्न होइए। तीनों लोकों के
निवासियों की पूजनीय माँ! सबको वरदान दो।
महाशक्तिमहं वन्दे, मातृवत् स्नेह दायिनीम्।
आचार्य चरणं नौम्युक्तं, पारिजात सौरभम् ॥
सम्पादित :
एस. एस. त्रिवेदी आचार्य श्री सूर्यदत्त शास्त्री 'रक्ताभ'
ए-३१, शिवाजी कालोनी महर्षि गर्गाचार्य ज्ञानपीठम्
मेरठ कैन्ट। सूर्यलोक, धर्मशाला घाट
पटना सिटी-२ (बिहार)
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