दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary
महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा
DevanagariHindipublished156 पृष्ठ
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श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ [ १००
भरद्वाज मुनि के इंगित पर नृत्य करता है। जब भरत जी अपने
पूज्य पिता जी के और्ध्वदैहिक संस्कारोपरान्त गुरुजनों की अनुमति
से श्रीराम जी को वन से अयोध्या लौटा लाने के लिये चित्रकूट
को प्रस्थान करते हुए, मार्ग में भरद्वाज मुनि के आश्रम में ससैन्य
परिकर एवं परिवार सहित रात्रि में विश्राम करने के लिए ठहरे;
तब मुनि के द्वारा क्षणभर में समस्त सुख सुविधा उपस्थित
करदी गईं हैं।
इससे स्पष्ट है कि संयमी, निरभिमानी तथा ज्ञानी के लिए
ये महाशक्तियाँ सहज सुलभ हैं।