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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

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८७ ] श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ
चाहें मुझे अग्नि में जलना हो,
चाहे काँटों में मुझे चलना हो ।
चाहे छोड़ के देश निकलना हो,
रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ।
चाहे संकट ने मुझे घेरा हो,
चाहे चारों ओर अंधेरा हो ।
पर मन ना मेरा डगमग हो,
रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ।
ओठों पर तुम्हारा नाम रहे,
तेरी याद सुबह और शाम रहे ।
तेरी याद में आठों याम रहे,
रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ।
जब समस्त विकारों (निशाचरों से हीन) से रहित पवित्र
हृदय दैवी गुणों से भर जाता है तभी स्तुति होती है । महिषासुर
आदि दैत्यों के मारे जाने पर देवों द्वारा स्तुति की जाने का यही
अर्थ है । स्तुति के भाव ये हैं-‘देव्या ययेति’ सभी देवों की शक्ति
मिलकर एक महाशक्ति स्वरूपा-ऋषि-महात्माओं द्वारा वन्दिता
जगदम्बा को हम बड़े प्रेम भाव से नमस्कार करते हैं । नमस्कार
का अर्थ समर्पित होता है; आप हम लोगों का कल्याण करें ।
‘यस्या प्रभावमतुलं’ वाणी से परे परम तत्व का प्रतिपादन करने
में शेष जी तथा ब्रह्मादि देवता भी असमर्थ हैं अर्थात् ब्रह्मा बुद्धि
के देवता हैं और परम तत्व बुद्धि से परे है । भगवान् शिव
अहङ्कार के देवता हैं और परम तत्त्व अन्तःकरण का प्रकाशक है
तो प्रकाश्य सभी इन्द्रियाँ तथा उन पर बैठे हुए देवता हैं; वे
सभी प्रकाशक का वर्णन नहीं कर सकते –
चक्षुषः चक्षुः श्रोत्रस्य श्रोत्रम्’ वाला तत्व यहाँ प्रतिपाद्य
है ।
ये आँखें तुम को क्या देखें, सब आँखें तुमसे रोशन हैं ।